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    December 03, 2025

    बच्चों की रंग-बिरंगी पेंटिंग्स ने दर्शकों पर जमाया गहरा असर

    निवार्णवन फाउंडेशन की ओर से हाजीपुर डढ़ीकर स्थित अद्वैत गार्डन में चल रहे आठ दिवसीय आर्ट मेले के दूसरे दिन बच्चों ने मिट्टी से बेहतरीन कलाकृतियाँ तैयार कीं। यूपी से आए सेरेमिक आर्टिस्ट ने बच्चों को मिट्टी को गूंथने से लेकर उसे कलाकृति के योग्य मुलायम बनाने तक की तकनीक समझाई।

    दूसरे दिन चार स्कूलों के बच्चों को क्ले मॉडलिंग और पेंटिंग की गतिविधियाँ कराई गईं। गुजरात के भावनगर से आई आर्टिस्ट निरुपमा टांक ने बच्चों को पेंटिंग की बारीकियां बताईं। उन्होंने कहा कि सामान्य आकृतियों में कलात्मकता जोड़ने पर बच्चों की कल्पना शक्ति नए रूप में सामने आती है।

    चार समूहों में बांटकर कराई गतिविधियाँ

    मेले में बच्चों को चार समूहों में बांटकर क्ले आर्ट, थम्ब पेंटिंग और पारंपरिक चित्रकारी कराई गई। इसमें

    • पीपलगढ़ स्कूल से — 21
    • बंजारा बस्ती से — 23
    • राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय हाजीपुर ढाणी से — 32
    • निर्वाणवन फाउंडेशन अद्वैत गार्डन विद्यालय से — 37 बच्चे
      शामिल हुए।

    आर्टिस्टों ने बच्चों को भारतीय पारंपरिक कला और संस्कृति के प्रति प्रेरित किया। इसके अलावा बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आनंद लिया।

    कविता संग्रह का विमोचन और वितरण कार्यक्रम

    कार्यक्रम में जलदाय विभाग की एईएन श्रद्धा सिंह के कविता संग्रह ‘मनटेका’ का विमोचन निर्वाण बोधिसत्व ने किया। बाद में बच्चों को केले वितरित किए गए। रोटरी क्लब शौर्य ने आर्ट मेला के लिए स्टेशनरी का वितरण किया। नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तक प्रदर्शनी भी आयोजित रही।

    विशेषज्ञ कलाकारों ने दिया प्रशिक्षण

    प्रशिक्षण देने वाले कलाकारों में गुजरात की अनुपमा टांक, ऋषभ सिंह, यूपी के सेरेमिक आर्टिस्ट आषा गुप्ता, और अलवर की आर्टिस्ट उपासना सिंह शामिल रहे।

    निर्वाणवन फाउंडेशन के अध्यक्ष निर्वाण बोधिसत्व, परियोजना समन्वयक हवासिंह खटाणा, प्रधानाध्यापिका निकिता, दुर्गेश कुमारी, संगीता, मीनाक्षी सहित कई शिक्षक उपस्थित रहे।

    निरुपमा टांक ने बताया कि बच्चों को रेखाएं खींचना और रंग भरना स्वभाविक रूप से पसंद होता है। अगर उन्हें इन्हें ** व्यवस्थित तरीके से उपयोग करना** सिखाया जाए तो उनकी इमेजिनेशन तेजी से विकसित होती है।

    क्ले कलाकार ऋषभ सिंह ने कहा कि मिट्टी से खेलना बच्चों की पहली पसंद होती है, और इसी से कलाकृति निर्माण की बुनियादी क्षमता विकसित होती है।

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