राजस्थान के अलवर जिले के मुंडावर क्षेत्र में स्थित MITRC इंजीनियरिंग कॉलेज में एक बार फिर हाईटेक नकल का गंभीर मामला सामने आया है। यह कॉलेज मंजीत चौधरी का बताया जा रहा है। यहां परीक्षा के दौरान एक अभ्यर्थी को पकड़ा गया, जिसका पेपर वह खुद नहीं बल्कि दूर बैठा नकल माफिया रिमोट एक्सेस के जरिए सॉल्व कर रहा था। हैरानी की बात यह है कि बीते छह महीनों में यह दूसरी बड़ी धांधली है।
कंप्यूटर खुद चलने से खुला राज
मामला 17 दिसंबर का है, जब MITRC कॉलेज में दिल्ली पुलिस ड्राइवर भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। दूसरी पाली की परीक्षा दोपहर 3 बजे शुरू हुई थी। अलवर के बर्डोद निवासी छात्र सुरेंद्र सैनी परीक्षा हॉल में कंप्यूटर पर बैठा था। इसी दौरान ऑब्जर्वर पदम सिंह की नजर उसके सिस्टम पर पड़ी, जहां माउस अपने आप चलता दिखाई दिया। इस पर शक होने के बाद उन्होंने परीक्षा आयोजित करने वाली कंपनी एडीक्यूटी के वेन्यू मैनेजर मोहत सिंह को सूचना दी।
वीडियो मॉनिटरिंग में भी कंप्यूटर खुद-ब-खुद ऑपरेट होता दिखा, जिसके बाद छात्र को परीक्षा हॉल से बाहर बुलाया गया। इसके बाद सदर थाना पुलिस को सूचना दी गई और जांच शुरू हुई।
स्टाफ की भूमिका पर गंभीर सवाल
जांच के दौरान सामने आया कि नकल गिरोह के पास अभ्यर्थी के कंप्यूटर का IP एड्रेस था। शुरुआती पड़ताल में यह खुलासा हुआ कि यह IP कॉलेज स्टाफ के जरिए माफिया तक पहुंचा। पुलिस ने कॉलेज के तकनीकी कर्मचारी राहुल शर्मा को पूछताछ के लिए बुलाया। उसके मोबाइल की जांच में वॉट्सऐप चैट और कॉल डिटेल डिलीट मिली, जिससे संदेह और गहरा गया।
हालांकि पुलिस ने अब तक पूरे मामले का विस्तृत खुलासा नहीं किया है। फिलहाल एफआईआर में केवल इतना दर्ज है कि परीक्षार्थी का पेपर कोई अन्य व्यक्ति दूर बैठकर सॉल्व कर रहा था।
पहले भी सामने आ चुके हैं मामले
यह पहला मौका नहीं है जब MITRC कॉलेज में इस तरह की गड़बड़ी सामने आई हो। इसी साल 28 जुलाई को NET परीक्षा देने आई छात्राओं ने भी नकल को लेकर हंगामा किया था, लेकिन उस समय शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। इससे पहले 2022 में भी इसी कॉलेज में एक डमी कैंडिडेट को परीक्षा देते हुए पकड़ा गया था। उस मामले में भी पुलिस ने दो दिन तक कार्रवाई को दबाए रखा था।
7 लाख में हुआ था सौदा
पुलिस जांच में अभ्यर्थी सुरेंद्र ने स्वीकार किया है कि उसने गांव के कुछ लोगों से 7 लाख रुपए में पेपर पास कराने का सौदा किया था। वही लोग पूरे नकल नेटवर्क को चला रहे थे। हालांकि गिरोह के अन्य सदस्यों और कॉलेज स्टाफ की भूमिका को लेकर पुलिस जांच अभी जारी है।
पुलिस पर भी उठे सवाल
लगातार सामने आ रहे मामलों और अधूरे खुलासों के चलते अब पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच एजेंसियों से उम्मीद की जा रही है कि पूरे नकल नेटवर्क, कॉलेज स्टाफ की संलिप्तता और माफिया गिरोह की भूमिका का जल्द खुलासा किया जाएगा।
