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    November 14, 2025

    विश्वकप मेडल के साथ मनसा माता के दरबार में पहुंचीं शेफाली, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

    महिला विश्वकप–2025 के फाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच रहीं टीम इंडिया की स्टार क्रिकेटर शेफाली वर्मा गुरुवार सुबह कोटपूतली–बहरोड़ जिले के दहमी गांव पहुंचीं। यहां उन्होंने अपनी कुलदेवी मनसा माता के मंदिर में पूजा-अर्चना की और विश्वकप फाइनल का मेडल माता के चरणों में रखकर आशीर्वाद लिया। इस दौरान उनके साथ मां परवीन बाला, पिता संजीव वर्मा, भाई, ताऊ-ताई और चचेरे भाई-बहन सहित पूरा परिवार मौजूद रहा। मंदिर प्रशासन ने शेफाली का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।

    मंदिर में शेफाली ने 56 भोग अर्पित किए और कुलदेवी को चांदी का छत्र, सोने का हार, चांदी की पायजेब, सोने की नोज पिन, चुटकी, नए नोटों की माला, लाल साड़ी, श्रीफल और मुकुट भेंट किया।

    ‘मैं जो कुछ भी हूं, माता के आशीर्वाद से हूं’
    मीडिया से बातचीत में शेफाली ने कहा कि विश्वकप जीत उनके माता-पिता और मनसा माता की कृपा से संभव हुई। उन्होंने कहा, “सेमीफाइनल में जल्दी आउट होने के बाद दो दिन बेहद कठिन थे। जब फाइनल खेलने के लिए कहा गया तो बस यही सोचा कि इस मैच में अच्छा करना ही है। टीम से जुड़ते समय मन में था कि कम से कम एक मैच अपने दम पर जिताना है।”

    पीएम के मोटिवेशन ने बढ़ाया आत्मविश्वास
    प्रधानमंत्री से मुलाकात को लेकर शेफाली ने बताया, “प्रधानमंत्री जी ने हमें दो घंटे का समय दिया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री से मिलकर बहुत अच्छा लगा। हरियाणा सरकार हमेशा खिलाड़ियों के साथ खड़ी रहती है और हर सुविधा देती है।”

    ‘फियरलेस क्रिकेट में रिस्क भी है और रिवॉर्ड भी’
    शेफाली ने कहा कि दोनों टीमों—साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया—ने पूरा दम लगाया था। “ऑस्ट्रेलिया को हराने के बाद आत्मविश्वास मिला, लेकिन हम किसी टीम को हल्के में नहीं ले रहे थे। फियरलेस क्रिकेट में रिस्क रहता है, लेकिन रिवॉर्ड भी मिलता है। मैं वही करने की कोशिश करती हूं जिसकी टीम को जरूरत होती है।”

    बैटिंग पर किया कड़ा काम
    उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में उन्होंने अपनी बैटिंग पर काफी मेहनत की। “शायद माता ने वही मेहनत देखी और मुझे टीम में वापसी का रास्ता मिला। गांव लौटने पर रोहतक से भी लोग मिलने आए। मैं लड़कियों से कहती हूं कि चाहे किसी भी फील्ड में हों, मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती।”

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