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    December 29, 2025

    ईशान खट्टर का बड़ा बयान: समाज ने पुरुषों पर थोप दी है मर्दानगी की परिभाषा

    अभिनेता ईशान खट्टर का मानना है कि समाज में पुरुषों को एक अच्छा इंसान बनने की बजाय यह सिखाया जाता है कि उन्हें “स्त्री जैसा नहीं बनना” चाहिए। पुरुषवादी सोच और फिल्मों में दिखाए जाने वाले अल्फा-मैन कल्चर पर बात करते हुए ईशान ने पुरुषत्व और पुरुषवादिता को लेकर अपनी बेबाक राय साझा की है। अभिनेता ने यह भी स्वीकार किया कि उनके करियर को आकार देने में महिला फिल्ममेकर्स और नारीवादी दृष्टिकोण की अहम भूमिका रही है।

    अकेली मां ने किया पालन-पोषण

    युवा ऑल स्टार्स राउंडटेबल 2025 के दौरान ईशान खट्टर ने कहा कि पुरुषों को पुरुष बनना नहीं सिखाया जाता, बल्कि सिर्फ यह सिखाया जाता है कि वे स्त्री न बनें। उन्होंने बताया कि उनके लिए पुरुषत्व की परिभाषा पुरुष और स्त्री के बीच के संबंधों से जुड़ी है।
    ईशान ने कहा कि उनका पालन-पोषण एक अकेली मां ने किया है, जिसने उनके नजरिये को गहराई से प्रभावित किया। गौरतलब है कि ईशान, अभिनेता राजेश खट्टर और नीलिमा अजीम के बेटे हैं। जब ईशान महज छह साल के थे, तभी उनके माता-पिता अलग हो गए थे।

    करियर में महिला फिल्ममेकर्स का अहम योगदान

    ईशान खट्टर ने अपने करियर में मीरा नायर, नूपुर अस्थाना और प्रियंका घोष जैसी कई महिला फिल्ममेकर्स के साथ काम किया है। इस अनुभव पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि नारीवादी दृष्टिकोण को करीब से देखने और समझने का मौका उन्हें अपने काम के जरिए मिला।
    ईशान के अनुसार, अपने आठ साल के करियर में उन्होंने लगभग 50 प्रतिशत महिला निर्देशकों के साथ काम किया है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग नजरियों को समझना एक बड़ी ताकत है और सिनेमा का उद्देश्य भी यही है—सहानुभूति पैदा करना।

    वर्कफ्रंट

    वर्कफ्रंट की बात करें तो ईशान खट्टर हाल ही में फिल्म होमबाउंड में नजर आए हैं। नीरज घेवान के निर्देशन में बनी इस फिल्म को भारत की ओर से ऑस्कर के लिए भेजा गया है।

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