वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को लोकसभा में बहुप्रतीक्षित ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा विधेयक–2025’ पेश किया। इस विधेयक के जरिए बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश बढ़ाने और घरेलू बीमा कंपनियों की कार्यक्षमता मजबूत करने का रास्ता साफ किया गया है। प्रस्तावित कानून में 87 साल पुराने नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी है।
विधेयक के तहत बीमा अधिनियम (1938), जीवन बीमा निगम अधिनियम (1956) और बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम (1999) में संशोधन का प्रस्ताव है। वित्त मंत्री ने कहा कि आम लोगों को बीमा सुरक्षा देना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता रही है और सरकार ने कोविड काल में भी समाज के कमजोर वर्गों तक बीमा पहुंचाया।
सरकार ने बीमा कंपनियों में एफडीआई की सीमा 74% से बढ़ाकर 100% करने का प्रस्ताव रखा है। इससे भारतीय बीमा बाजार में विदेशी पूंजी, नई तकनीक और आधुनिक उत्पाद आने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बीमा कवरेज बढ़ेगा और प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।
विधेयक में एलआईसी बोर्ड को अधिक अधिकार देने का भी प्रावधान है। अब एलआईसी को नए जोनल ऑफिस खोलने के लिए केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति नहीं लेनी होगी, जिससे फैसले तेजी से हो सकेंगे।
इसके अलावा, बीमा एजेंटों और इंटरमीडियरीज के लिए वन-टाइम रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे बार-बार लाइसेंस रिन्यू कराने की जरूरत नहीं होगी और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा।
पॉलिसीधारकों की सुरक्षा को भी विधेयक का अहम हिस्सा बताया गया है। नियमों के उल्लंघन पर बीमा कंपनियों पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, दावों के निपटान को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए आईआरडीएआई को और सशक्त किया जाएगा।
विधेयक में विदेशी री-इंश्योरेंस कंपनियों को भी राहत दी गई है। उनके लिए नेट ओन्ड फंड की शर्त 5,000 करोड़ रुपए से घटाकर 1,000 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव है, जिससे भारत में री-इंश्योरेंस बाजार का विस्तार होगा।
सरकार का कहना है कि भारत में बीमा की पहुंच अभी वैश्विक औसत से कम है और 2047 तक हर नागरिक को बीमा सुरक्षा देने के लिए बड़े निवेश की जरूरत है। वहीं विपक्ष और कर्मचारी संगठनों ने एलआईसी में सरकारी नियंत्रण कम होने और विदेशी कंपनियों के वर्चस्व को लेकर चिंता जताई है। हालांकि, विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि 100% एफडीआई की स्थिति में भी कंपनी के प्रमुख पदों पर भारतीय नागरिक की नियुक्ति सुनिश्चित की जा सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार, इस विधेयक के पारित होने से बीमा सेक्टर में बड़ा बदलाव आ सकता है और इसका असर आने वाले दिनों में शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।
