केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी दरों में 22 सितंबर से होने जा रहे बदलाव की खासियत बताई। उन्होंने कहा कि जीएसटी दरों में बदलाव देश के हर नागरिक की बड़ी जीत है। पीएम मोदी ने दिवाली पर जीएसटी दरों में बदलाव करने के निर्देश दिए थे, लेकिन हमने इसे दिवाली से काफी पहले लागू कर दिया।
चेन्नई सिटीजन फोरम के 'उभरते भारत के लिए कर सुधार' विषय पर व्यापार एवं उद्योग संघ के संयुक्त सम्मेलन में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी दरों में बदलाव का लाभकारी प्रभाव सुबह से लेकर रात को सोने तक सभी उत्पादों पर रहेगा। जीएसटी के तहत जिन 99 प्रतिशत वस्तुओं पर पहले 12 प्रतिशत कर लगता था, अब उन्हें घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद ने 350 से अधिक वस्तुओं पर कर की दरें कम कर दी हैं। केंद्र ने पहले अलग-अलग स्लैब के तहत कर लगाने की प्रथा के बजाय केवल 5 और 28 प्रतिशत की स्लैब शुरू की है। हमने व्यापारियों के लिए भी प्रक्रिया सरल कर दी है। किसी भी उत्पाद पर 28 प्रतिशत जीएसटी कर नहीं है।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि विपक्षी दल के नेता राहुल गांधी ने जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स कहा था, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद पिछले आठ साल में कर चुकाने वाले व्यवसायों की संख्या बढ़कर 1.5 करोड़ हो गई है क्योंकि उन्हें एहसास हुआ कि वे इससे लाभान्वित हो सकेंगे। यह संख्या भविष्य में और बढ़ेगी। इस वृद्धि के कारण केंद्र और राज्य सरकारों के राजस्व में वृद्धि हुई है।
जीएसटी संग्रह 22 लाख करोड़ के पार पहुंचा
उन्होंने कहा कि 2017 में कर संग्रह 7.19 लाख करोड़ रुपये था और अब सकल जीएसटी संग्रह 22 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा औसतन 1.8 लाख से 2 लाख करोड़ रुपये का राजस्व एकत्र किया जाता है। 1.80 लाख करोड़ रुपये के सकल राजस्व को आधा-आधा बांटा जाता है, जिसमें राज्यों को 90,000 करोड़ रुपये और केंद्र को 90,000 करोड़ रुपये मिलते हैं। यहां तक कि केंद्र के हिस्से के 90,000 करोड़ रुपये के राजस्व में से भी लगभग 41 प्रतिशत राज्यों को वापस जाता है। उन्होंने कहा कि इससे हम समझ सकते हैं कि जीएसटी से जनता और राज्य सरकार को लाभ होगा।
सड़क किनारे बिकने वाले पॉपकॉर्न पर कोई कर नहीं
जीएसटी सुधारों के लागू होने से पहले व्यापारियों द्वारा उठाए गए वर्गीकरण के मुद्दे पर सीतारमण ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि पॉपकॉर्न की बिक्री के लिए एक वर्गीकरण किया गया है। अगर नमकीन पॉपकॉर्न बेचा जाता है, तो नमकीन श्रेणी में बेचने पर पांच प्रतिशत कर लगेगा, जबकि मीठे पॉपकॉर्न पर 18 प्रतिशत कर लगाया जाता है। सड़क किनारे बिकने वाले पॉपकॉर्न पर कोई कर नहीं है। लेकिन जब वही पॉपकॉर्न ब्रांडेड होता है और किसी कारखाने में बनता है, तो यह वर्गीकरण लागू होता है। लेकिन नए जीएसटी सुधारों में इसे सरल बना दिया गया है। अब सभी खाद्य उत्पाद 5 प्रतिशत के स्लैब में आ गए हैं या उन पर कोई कर नहीं लगाया गया है। अब वर्गीकरण की कोई समस्या नहीं है। यह पॉपकॉर्न आप सभी के समझने के लिए एक उदाहरण है।
