भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार, 12 सितंबर 2025 को होने जा रही है। इस बैठक में बाजार से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा और निर्णय की उम्मीद है। इनमें एफआईएफ (Foreign Investment Fund) योजनाओं के लिए न्यूनतम निवेश सीमा घटाने, बड़ी सार्वजनिक कंपनियों के लिए शेयरधारिता नियमों में बदलाव, पुराने स्टॉकब्रोकर नियमों की समीक्षा और निवेश सलाहकारों को राहत देने जैसे कई बड़े मुद्दे शामिल हैं।
बैठक में किन विषयों पर होगा मंथन?
सेबी की इस बैठक में जिन मुख्य बिंदुओं पर चर्चा हो सकती है, वे हैं:
एफआईएफ योजनाओं में निवेश सीमा कम करना: वर्तमान में ऐसे फंड में निवेश के लिए 70 करोड़ रुपये की न्यूनतम राशि की जरूरत होती है, जिसे घटाकर 25 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। इससे बीमा कंपनियों जैसी बड़ी संस्थाएं भी इन योजनाओं में निवेश कर सकेंगी।
पब्लिक कंपनियों के शेयरधारिता नियमों में बदलाव: जिन कंपनियों की पूंजी 50,000 करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपये के बीच है, उनके लिए निर्गम के बाद कम से कम 8% सार्वजनिक शेयरधारिता रखने का प्रस्ताव है। साथ ही, 15% हिस्सेदारी पांच साल में और 25% दस साल में पूरी करनी होगी।
- 1992 के स्टॉकब्रोकर नियमों की समीक्षा
- रेटिंग एजेंसियों का दायरा बढ़ाना
- REITs और InvITs को इक्विटी उपकरणों के रूप में मान्यता देना
- निवेश सलाहकारों और रिसर्च एनालिस्ट्स को नियामकीय राहत देना
विशेषज्ञों की राय
किशोर ओतस्वाल, वरिष्ठ विशेषज्ञ, CNN रिसर्च, का कहना है:
"सेबी का मुख्य उद्देश्य बाजार को ज्यादा समावेशी बनाना है। अगर एफआईएफ की प्रवेश सीमा घटाई जाती है, तो अधिक संस्थागत निवेशक आकर्षित होंगे, जिससे पूंजी प्रवाह बढ़ेगा।"
चिराग जैन, CEO, आशिका क्रेडिट कैपिटल, कहते हैं:
"सेबी का कदम निवेशकों और उद्योग दोनों के लिए सकारात्मक है। सह-निवेशक विकल्प से पारदर्शिता बढ़ेगी और निवेशकों की भागीदारी भी सार्थक होगी।"
संभावित असर
- सेबी की इस बैठक से यह उम्मीद की जा रही है कि:
- निवेशकों को अधिक विकल्प और लचीलापन मिलेगा
- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा
- कॉरपोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता में सुधार होगा
- म्यूचुअल फंड्स, बीमा और पेंशन फंड्स को एंकर इन्वेस्टर्स कोटे में शामिल किया जा सकता है
