बड़े निवेश प्रस्तावों, व्यापार करने में आसानी को बेहतर बनाने के प्रयासों और निवेश समर्थक नए व्यापार समझौतों के चलते अगले साल देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में मजबूत वृद्धि दर्ज होने की उम्मीद है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने इस वर्ष एफडीआई को बढ़ावा देने के उपायों को लेकर उद्योग जगत और अन्य हितधारकों के साथ कई बैठकें की हैं।
नवंबर में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने निवेश प्रक्रियाओं को तेज, सरल और अधिक प्रभावी बनाने को लेकर व्यापक विचार-विमर्श किया। सरकार की ओर से निवेशक-अनुकूल नीतियों और नियामकीय प्रक्रियाओं में सुधार किए गए हैं, जिससे अनुपालन का बोझ घटा है और निवेश पर रिटर्न बेहतर हुआ है। उद्योग से जुड़ी छोटी प्रक्रियागत चूकों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना और मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाना जैसे कदम विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ा रहे हैं।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा FDI
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद वित्त वर्ष 2024-25 में भारत में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश रिकॉर्ड 80.5 अरब डॉलर से अधिक रहा है। जनवरी से अक्तूबर 2025 के दौरान एफडीआई 60 अरब डॉलर से ज्यादा दर्ज किया गया है, जो मार्च के अंत तक 80.62 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। सरकार के मुताबिक, बीते 11 वर्षों में भारत ने निवेश आकर्षित करने के मामले में उल्लेखनीय प्रगति की है।
भारत को यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते से भी बड़ी उम्मीदें हैं। इस समझौते के तहत ईएफटीए देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
वैश्विक गिरावट के बीच भारत चमका
जहां विकसित देशों में एफडीआई में करीब 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, वहीं एशिया—खासतौर पर भारत, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशिया—में निवेशकों की सक्रियता बनी हुई है। कई वैश्विक कंपनियों ने भारत में बड़े निवेश की घोषणा की है।
वैश्विक कंपनियों का बड़ा दांव
- Microsoft ने भारत के एआई आधारित भविष्य को मजबूत करने के लिए 2030 तक 17.5 अरब डॉलर निवेश की घोषणा की है।
- Amazon अगले पांच वर्षों में भारत में 35 अरब डॉलर निवेश करेगा।
- Google ने भी इसी अवधि में 15 अरब डॉलर निवेश करने की योजना बताई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिर नीतियां, मजबूत घरेलू बाजार और लगातार हो रहे संरचनात्मक सुधार भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बनाए हुए हैं, जिससे आने वाले वर्षों में एफडीआई की रफ्तार और तेज हो सकती है।
