हवा में बढ़ते प्रदूषण और जहरीले कणों के कारण इन दिनों एलर्जी, लगातार छींक आना, नाक बहना और आंखों में जलन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इन लक्षणों से तुरंत राहत पाने के लिए कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से एंटी-एलर्जिक दवाएं खरीदकर सेवन करने लगते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत सेहत के लिए जोखिम भरी साबित हो सकती है।
इस विषय पर ओडिशा के एक निजी अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर रवि कुशवाहा ने बताया कि प्रदूषण से होने वाली एलर्जी में लिवोसेट्रिजिन, सेट्रिजिन और फेक्सोफेनाडिन जैसी एंटीहिस्टामिनिक दवाएं असरदार जरूर होती हैं, लेकिन इन्हें केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए। बिना परामर्श इन दवाओं का बार-बार सेवन शरीर की प्राकृतिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
डॉ. कुशवाहा के मुताबिक, खुद से दवा लेने का सबसे बड़ा खतरा गलत खुराक का होता है। हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और एलर्जी की गंभीरता अलग होती है। गलत या जरूरत से ज्यादा डोज लेने से लिवर और किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। कुछ मामलों में इन दवाओं से अत्यधिक सुस्ती, चक्कर आना, धुंधला दिखना और पेशाब से जुड़ी दिक्कतें भी हो सकती हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक या बार-बार एंटी-एलर्जिक दवाएं लेने से शरीर उनमें टॉलरेंस विकसित कर लेता है। इसका मतलब यह है कि भविष्य में वही असर पाने के लिए ज्यादा खुराक की जरूरत पड़ सकती है। इससे दवाओं पर निर्भरता बढ़ती है और शरीर का प्राकृतिक इम्यून रिस्पॉन्स कमजोर हो सकता है।
नींद और एकाग्रता पर असर भी इन दवाओं का एक सामान्य साइड इफेक्ट है। खासतौर पर सेट्रिजिन जैसी दवाएं लेने के बाद गहरी नींद और थकान महसूस हो सकती है। ऐसे में वाहन चलाने या मशीनों पर काम करने वालों के लिए यह खतरनाक साबित हो सकता है। हालांकि कुछ दवाएं कम सुस्ती पैदा करती हैं, लेकिन उनकी सही खुराक भी डॉक्टर ही तय करते हैं।
डॉक्टरों की सलाह है कि प्रदूषण से बचाव के लिए दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय सावधानियां अपनाई जाएं। बाहर निकलते समय एन-95 मास्क का उपयोग करें, घर लौटकर भाप लें, सुबह-शाम खुले में टहलने से बचें और भोजन में एंटीऑक्सीडेंट युक्त चीजें शामिल करें। अगर एलर्जी के लक्षण गंभीर हों या लंबे समय तक बने रहें, तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
