राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में इन दिनों भीषण ठंड का असर देखने को मिल रहा है। गिरता तापमान, कोहरा और शीतलहर के कारण जनजीवन प्रभावित है। यह मौसम सेहत के लिए भी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है, खासतौर पर दिल के मरीजों के लिए सर्दियां बेहद जोखिम भरी मानी जाती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड बढ़ने पर हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। तापमान गिरने से धमनियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि सर्दियों में दिल की सेहत को लेकर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी हो जाती है।
ठंड का दिल पर कैसे पड़ता है असर
हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि सर्द मौसम में शरीर खुद को गर्म रखने के लिए रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर देता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और दिल को सामान्य से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इसके अलावा ठंड में खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे नसों में थक्का जमने का खतरा बढ़ जाता है। यही थक्का जब दिल की धमनियों में रुकावट पैदा करता है, तो हार्ट अटैक की स्थिति बन सकती है।
हार्ट अटैक में जान बचाने वाली ‘राम किट’
डॉक्टरों की सलाह है कि दिल के मरीजों को हमेशा अपने पास एक इमरजेंसी मेडिसिन किट रखनी चाहिए, जिसे आमतौर पर ‘राम किट’ कहा जाता है। हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षण दिखते ही यह किट जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, हार्ट अटैक के संकेत मिलते ही तुरंत
- इकोस्प्रिन 75 mg की दो गोलियां,
- रोसुवास्टेटिन 20 mg की एक गोली
लेनी चाहिए। इसके बाद - सोर्बिट्रेट 5 mg की गोली को जीभ के नीचे रखकर चूसना चाहिए।
इन दवाओं से हार्ट अटैक की गंभीरता कम हो सकती है और मरीज को अस्पताल पहुंचाने तक कीमती समय मिल सकता है। खास बात यह है कि इन दवाओं की कीमत बेहद कम होती है, लेकिन सही समय पर इस्तेमाल जान बचा सकता है।
सीपीआर की जानकारी भी जरूरी
डॉक्टरों का यह भी कहना है कि दवाओं के साथ-साथ सीपीआर (CPR) जैसी जीवनरक्षक तकनीकों की जानकारी होना भी बेहद जरूरी है, ताकि आपात स्थिति में मरीज की जान बचाई जा सके।
सलाह: सर्दियों में दिल के मरीज नियमित दवाएं लें, ठंड से बचें, सुबह-शाम की ठंडी हवा से दूरी बनाएं और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
