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    September 27, 2025

    डार्क चॉकलेट खाकर घट सकता है फैटी लिवर का रिस्क, जानें वैज्ञानिक क्या कहते हैं

    डार्क चॉकलेट एक स्वादिष्ट लेकिन कम पसंद की जाने वाली चॉकलेट है। आमतौर पर इसे मूड बेहतर बनाने से जोड़ा जाता है, लेकिन शोध बताते हैं कि इसके फायदे इससे कहीं अधिक हैं। इनमें सबसे अहम फायदा यह है कि यह लिवर हेल्थ को बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है।

    फैटी लिवर और डार्क चॉकलेट

    नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट का सेवन नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) के खतरे को घटा सकता है।
    फैटी लिवर वह स्थिति है, जब शराब का सेवन न करने के बावजूद लिवर की कोशिकाओं में अतिरिक्त फैट जमा हो जाता है। आगे चलकर यह सूजन और अन्य गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।

    क्यों है फायदेमंद?

    डार्क चॉकलेट में मौजूद पॉलीफेनोल्स और फ्लेवनॉल्स शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी कंपाउंड हैं। ये शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं और सूजन घटाते हैं, जिससे लिवर की कोशिकाओं को सुरक्षा मिलती है।
    कई स्टडी में पाया गया है कि हाई-कोको वाली डार्क चॉकलेट का सेवन करने वालों के लिवर एंजाइम (ALT) बेहतर पाए गए। साथ ही, डार्क चॉकलेट इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारती है, जो फैटी लिवर का एक बड़ा कारण है।

    कौन सी डार्क चॉकलेट चुनें?

    • सभी तरह की चॉकलेट लिवर के लिए फायदेमंद नहीं होतीं। इसके लिए कम से कम 70% या उससे अधिक कोको वाली डार्क चॉकलेट का सेवन करना चाहिए।
    • कोको की मात्रा जितनी अधिक होगी, फ्लेवनॉल्स की मात्रा उतनी ही ज्यादा होगी और चीनी की मात्रा उतनी ही कम।
    • मिल्क चॉकलेट या अधिक शुगर और फैट वाली चॉकलेट से बचें, क्योंकि ये नुकसान पहुंचा सकती हैं।

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