आजकल लगभग हर घर में ब्लड प्रेशर मापने की मशीन मौजूद है और लोग डॉक्टर के पास जाने के बजाय खुद ही घर पर बीपी चेक करने लगे हैं। यह सुविधा जहां एक ओर फायदेमंद है, वहीं जानकारी की कमी के कारण लोग अक्सर बीपी रीडिंग को समझने में बड़ी गलती कर बैठते हैं। अधिकतर लोगों को लगता है कि जब तक बीपी 120/80 mmHg से ज्यादा नहीं है, तब तक चिंता की कोई बात नहीं है, जबकि यह सोच आगे चलकर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
डॉक्टरों के मुताबिक बीपी की रीडिंग में हल्की सी बढ़ोतरी को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यही आगे चलकर हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी समस्याओं की वजह बन सकती है। इस बारे में डॉ. ऋचा तिवारी ने सोशल मीडिया पर साझा एक वीडियो में विस्तार से जानकारी दी है।
बीपी रीडिंग को सही तरह समझना जरूरी
ब्लड प्रेशर की रीडिंग में ऊपर की संख्या को सिस्टोलिक बीपी कहा जाता है, जो दिल के पंप करने के समय का दबाव दर्शाती है, जबकि नीचे की संख्या डायस्टोलिक बीपी होती है, जो दिल के आराम की स्थिति का दबाव बताती है।
लोग कहां करते हैं गलती?
डॉ. ऋचा तिवारी के अनुसार सबसे आम गलती यह है कि लोग 120 से 129 सिस्टोलिक और 80 से कम डायस्टोलिक (120–129 / <80 mmHg) रीडिंग को भी सामान्य मान लेते हैं। जबकि मेडिकल भाषा में इसे एलिवेटेड बीपी कहा जाता है। यह स्थिति सामान्य बीपी से ऊपर की पहली चेतावनी होती है और इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है।
एलिवेटेड बीपी के खतरे
एलिवेटेड बीपी को नजरअंदाज करने से आगे चलकर हाइपरटेंशन हो सकता है, जिससे दिल की बीमारी, स्ट्रोक और किडनी डैमेज का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि अच्छी बात यह है कि शुरुआती स्तर पर इसे दवाओं के बिना भी कंट्रोल किया जा सकता है।
जीवनशैली में बदलाव है जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि एलिवेटेड बीपी को सामान्य करने के लिए नियमित व्यायाम, कम नमक वाला संतुलित आहार, तनाव से बचाव और वजन को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। ये बदलाव बीपी को दोबारा सामान्य स्तर पर लाने में मदद करते हैं।
हाइपरटेंशन कब माना जाता है?
अगर किसी व्यक्ति का सिस्टोलिक बीपी 130 या उससे अधिक और/या डायस्टोलिक बीपी 80 या उससे अधिक हो जाता है, तो इसे हाइपरटेंशन माना जाता है। इस स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना और दवाओं के साथ-साथ जीवनशैली में सुधार करना जरूरी हो जाता है।
डॉक्टरों की सलाह है कि घर पर बीपी मापते समय रीडिंग को हल्के में न लें और समय रहते सही कदम उठाएं, ताकि भविष्य में गंभीर बीमारियों से बचा जा सके।
