आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हाई फैट वाले भोजन, जैसे कि क्रीमी मिल्कशेक, तला-भुना खाना या चीज कुछ लोगों के डाइट का हिस्सा बन चुका है। पर क्या आपको पता है कि सिर्फ एक बार भी अधिक फैट वाला भोजन खाने से भी आपकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है? इस शोध के मुताबिक ऐसा भोजन हमारे दिल और दिमाग में रक्त के प्रवाह कुछ समय के लिए प्रभावित कर सकता है। इससे रक्त वाहिकाओं का लचीलापन कम हो जा सकता है, जिससे ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।
अगर यह आदत बनी रहे, तो आगे चलकर ये दिल और दिमाग दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। आइए इस लेख में जानते हैं कि ज्यादा फैट वाले भोजन से आपके शरीर और दिमाग पर क्या असर पड़ सकता है।
हाई फैट मिल्क से नुकसान
हाल ही में साइंसडायरेक्ट में प्रकाशित एक शोध में वैज्ञानिकों ने दो समूहों पर अध्ययन किया, 18 से 35 साल के 20 पुरुष और 60 से 80 साल के 21 पुरुष। सभी प्रतिभागी स्वस्थ थे, धूम्रपान नहीं करते थे और उन्हें दिल, फेफड़े या दिमाग से जुड़ी कोई बीमारी नहीं थी। वे कोई भी सप्लीमेंट या दवाई नहीं ले रहे थे।
इन सभी प्रतिभागी को एक हाई फैट लिक्विड दिया गया, जिसमें 350 मिलीलीटर हैवी व्हिपिंग क्रीम, 2 बड़े चम्मच चॉकलेट सिरप, 1 बड़ा चम्मच दानेदार चीनी, 1 बड़ा चम्मच इंस्टेंट नॉन-फैट ड्राई मिल्क मिलाया गया था। इसमें 1,362 कैलोरी और 130 ग्राम फैट था, जो एक सामान्य से ज्यादा फैट वाले भोजन के बराबर था।
ब्लड फ्लो पर सीधा असर
वैज्ञानिकों ने अल्ट्रासाउंड की मदद से प्रतिभागियों के हाथ और दिमाग की रक्त वाहिकाओं में ब्लड फ्लो को मापा। उन्होंने पाया कि लिक्विड पीने के चार घंटे बाद ही रक्त वाहिकाओं का लचीलापन कम हो गया था। इससे पता चला कि भले ही यह बदलाव अस्थायी था, लेकिन एक बार का ज्यादा फैट वाला भोजन भी रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकता है।
दिमाग और दिल पर प्रभाव
शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि ज्यादा फैट वाला भोजन रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) को नियंत्रित करने की शरीर की क्षमता को कम कर देता है। समय के साथ, इस तरह के भोजन का लगातार सेवन धमनियों में प्लाक के जमा होने का कारण बन सकता है, जिससे दिल की बीमारियां और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
क्या करें?
यह शोध हमें याद दिलाता है कि भले ही ज्यादा फैट वाला भोजन स्वादिष्ट लगे, लेकिन इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अपने दिल और दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए सैचुरेटेड फैट और ट्रांस फैट का सेवन कम करें। इनकी जगह हेल्दी फैट्स जैसे एवोकाडो, नट्स और सीड्स को डाइट में शामिल करें। इसके अलावा अपनी दिनचर्या में नियमित व्यायाम और संतुलित आहार शामिल करें।
