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    September 03, 2025

    हार्ट अटैक से बचना है तो कराएं ये 6 जांच, जानें दिल की सेहत का हाल!

    आज की बदलती जीवनशैली में हृदय रोग एक गंभीर समस्या बनकर उभरा है, जो न सिर्फ बुजुर्गों को, बल्कि युवाओं को भी प्रभावित कर रहा है। हार्ट अटैक का मुख्य कारण दिल की धमनियों में फैट का जमना है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित होता है। अक्सर लोग दिल की बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है।

    लेकिन, कुछ जरूरी जांचें करवाकर हम दिल की सेहत का पता लगा सकते हैं और हार्ट अटैक के खतरे को समय रहते पहचान सकते हैं। ये जांचें एक तरह से दिल के स्वास्थ्य की 'रिपोर्ट' होती हैं, जो हमें बताती हैं कि हमारा दिल कितना स्वस्थ है। आइए इस लेख में ऐसी 6 महत्वपूर्ण जांचों के बारे में जो दिल से संबंधित बीमारियों के खतरे को पहले ही बता सकती हैं और आपके दिल के स्वास्थ्य को सुरक्षा दे सकती हैं।

    इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी)
    ईसीजी दिल के स्वास्थ्य की सबसे पहली और बुनियादी जांच है। यह दिल की धड़कन और इलेक्ट्रिक एक्टिविटी को रिकॉर्ड करती है। अगर आपकी दिल की धड़कन अनियमित है, तो ईसीजी से इसका पता लगाया जा सकता है। यह टेस्ट दिल के दौरे के दौरान या बाद में होने वाली क्षति का पता लगाने में भी मदद करता है।

    2D इकोकार्डियोग्राफी (2D ECHO)
    यह एक तरह का अल्ट्रासाउंड टेस्ट है जो दिल की संरचना और कार्य को दिखाता है। 2D ECHO से यह पता लगाया जाता है कि दिल के वॉल्व और चैम्बर ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं। यह दिल की पम्पिंग क्षमता और किसी भी संरचनात्मक असामान्यता को पहचानने में बहुत मददगार होता है।

    ट्रेडमिल टेस्ट (टीएमटी)
    ट्रेडमिल टेस्ट, जिसे स्ट्रेस टेस्ट भी कहते हैं, यह पता लगाता है कि आपका दिल शारीरिक तनाव के दौरान कैसा प्रदर्शन करता है। इस टेस्ट में आपको एक ट्रेडमिल पर चलना होता है, जिसकी गति और ढलान को धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है, इसी दौरान डॉक्टर आपकी ईसीजी और ब्लड प्रेशर की निगरानी करते हैं। यह दिल की छिपी हुई समस्याओं को उजागर कर सकता है जो आराम की स्थिति में नहीं दिखतीं है।

    कार्डियक बायोमार्कर्स
    जब दिल को नुकसान पहुंचता है, तो खून में कुछ खास प्रोटीन और एंजाइम निकलने लगते हैं। ट्रोपोनिन और क्रिएटिन काइनेज (CK-MB) जैसे बायोमार्कर्स का बढ़ा हुआ स्तर यह संकेत देता है कि दिल की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा है। हार्ट अटैक के बाद इस टेस्ट को बार-बार किया जाता है ताकि नुकसान की गंभीरता का पता लगाया जा सके।

    इंफ्लेमेटरी मार्कर्स
    शरीर में सूजन भी दिल की बीमारियों का एक प्रमुख कारण है। सी-रिएक्टिव प्रोटीन (CRP) जैसे इंफ्लेमेटरी मार्कर्स का बढ़ा हुआ स्तर यह बताता है कि शरीर में कहीं सूजन है, जो दिल के दौरे के खतरे को बढ़ा सकती है। यह टेस्ट दिल की बीमारी के खतरे का आकलन करने में मदद करता है।

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