जोड़ों और हड्डियों में दर्द को आमतौर पर उम्र बढ़ने से जुड़ी समस्या माना जाता रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में यह दिक्कत कम उम्र के युवाओं को भी तेजी से प्रभावित कर रही है। अब 30 साल की उम्र में ही घुटनों, कमर और जोड़ों में दर्द की शिकायत आम होती जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बदलती जीवनशैली और ग़लत खानपान इसकी मुख्य वजहें हैं।
कम उम्र में आर्थराइटिस के पीछे क्या हैं कारण?
डॉक्टर बताते हैं कि आजकल ज्यादातर लोग दिनभर कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल पर काम करते हैं। लंबे समय तक बैठना, व्यायाम की कमी, और खराब पोश्चर के कारण मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
वहीं दूसरी ओर, जंक फूड, तली-भुनी चीज़ें और मीठे पदार्थों का ज़्यादा सेवन शरीर में सूजन (Inflammation) बढ़ाता है। यह सूजन आर्थराइटिस और जोड़ों के दर्द को बढ़ावा देती है।
वजन और पोषण की कमी भी बड़ी वजहें
विशेषज्ञों का मानना है कि वजन बढ़ना भी हड्डियों और जोड़ों पर दबाव डालता है, खासकर घुटनों और कमर पर। इससे कार्टिलेज (जोड़ों की गद्दी) पर असर होता है और दर्द की आशंका बढ़ जाती है।
इसके अलावा, शरीर में विटामिन डी, कैल्शियम, और ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसे पोषक तत्वों की कमी हड्डियों को कमजोर बना देती है। इससे 30 से कम उम्र में भी हड्डियों की समस्याएं बढ़ने लगती हैं।
डॉ. जोहैब काजी क्या कहते हैं?
- फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. जोहैब काजी बताते हैं कि आर्थराइटिस कई कारणों से हो सकता है।
- असंतुलित खानपान
- नींद की कमी
- तनाव
- प्रदूषण
- और शरीर में बढ़े हुए फ्री रेडिकल्स, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं
ये सभी मिलकर जोड़ों में दर्द, जकड़न और सूजन जैसी समस्याएं पैदा करते हैं।
मोटापा और हार्मोनल असंतुलन का असर
कम उम्र में आर्थराइटिस बढ़ने का एक और बड़ा कारण है मोटापा। वजन बढ़ने से घुटनों, कमर और कंधों पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे जोड़ों में दर्द होता है।
महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन, जैसे पीसीओएस और थायरॉइड की समस्या, और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन की कमी भी हड्डियों को नुकसान पहुंचा सकती है।
जो लोग दिनभर बैठे रहते हैं, उनमें मांसपेशियों में रक्त संचार कम हो जाता है और उनकी लचीलापन भी घटती है। इससे भी जोड़ों में अकड़न और दर्द बढ़ सकता है।
