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    November 05, 2025

    सुबह खाली पेट कॉपर वॉटर पीना सेहत के लिए अच्छा या हानिकारक? जानिए रिसर्च क्या कहती है

    सदियों से भारतीय परंपरा में तांबे के बर्तन में पानी पीना एक स्वास्थ्यवर्धक आदत मानी जाती रही है, जिसे ‘ताम्र जल’ कहा जाता है। माना जाता है कि तांबा (कॉपर) पानी को शुद्ध करता है और उसमें औषधीय गुण जोड़ देता है। लेकिन क्या यह वाकई उतना फायदेमंद है जितना हम सोचते हैं? आइए जानते हैं कि कॉपर वॉटर सेहत को कैसे प्रभावित करता है।

    शरीर के लिए जरूरी है तांबा, लेकिन बहुत कम मात्रा में

    तांबा हमारे शरीर के लिए एक आवश्यक पोषक तत्व है, जो लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण, आयरन के अवशोषण और तंत्रिका तंत्र के सही कार्य के लिए जरूरी है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी जरूरत बेहद कम होती है — लगभग 0.9 मिलीग्राम प्रतिदिन। यह मात्रा संतुलित आहार से आसानी से पूरी हो जाती है।

    ज्यादा कॉपर से हो सकती है ‘कॉपर टॉक्सिसिटी’

    अगर आप रोजाना तांबे के बर्तन में रखा पानी पीते हैं, तो शरीर में तांबे की मात्रा जरूरत से अधिक हो सकती है। शोध बताते हैं कि तांबे की अधिकता से कॉपर टॉक्सिसिटी हो सकती है, जिससे मितली, पेट दर्द, थकान जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। लंबे समय तक ऐसा जारी रहने पर यह लिवर डैमेज जैसी गंभीर दिक्कतों का कारण भी बन सकती है।

    दिनभर तांबे का पानी पीने से बचें

    हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि दिनभर सिर्फ तांबे के बर्तन का पानी पीना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे शरीर में तांबे का स्तर बढ़ जाता है, जो खासकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

    तांबे के पानी का सही सेवन तरीका

    कॉपर वॉटर के फायदे तभी मिलते हैं जब इसका सेवन संतुलित तरीके से किया जाए। एक्सपर्ट्स के अनुसार—

    • तांबे के बर्तन में रातभर (6–8 घंटे) तक पानी रखकर सुबह खाली पेट पिएं।
    • दिनभर सामान्य गिलास या स्टील के बर्तन में रखा पानी ही पिएं।
    • तांबे के बर्तन को नियमित रूप से साफ करते रहें ताकि उसमें हानिकारक तत्व न जमें।

    निष्कर्ष:
    तांबे के बर्तन में रखा पानी सेहत के लिए फायदेमंद जरूर है, लेकिन “अति सर्वत्र वर्जयेत” यानी किसी भी चीज की अति हानिकारक होती है। सही मात्रा और सही तरीके से पिएं, तभी ‘ताम्र जल’ आपके स्वास्थ्य के लिए वरदान बन सकता है।

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