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    September 09, 2025

    सेडेंटरी लाइफस्टाइल से स्वास्थ्य पर पड़ते हैं ये खतरनाक प्रभाव, सुधारें अपनी दिनचर्या!

    आज की आधुनिक दुनिया में जहां तकनीक और आराम ने हमारे जीवन को आसान बना दिया है, वहीं एक गंभीर समस्या भी खूब देखने को मिल रही है, और वो है सेडेंटरी लाइफस्टाइल। इसको सरल करके समझें तो यह एक ऐसी जीवनशैली है जिसमें शारीरिक गतिविधि बहुत कम या न के बराबर होती है। अक्सर लोग दफ्तरों में घंटों बैठकर काम करते हैं, कुछ लोग घर पर ही बैठे-बैठे टीवी या मोबाइल पर ज्यादा समय बिताते हैं और व्यायाम भी नहीं करते हैं। बहुत से इस जीवनशैली को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसका हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है।

    यह धीरे-धीरे हमारे शरीर को अंदर से खोखला कर देता है। सेडेंटरी लाइफस्टाइल न सिर्फ मोटापे और दिल की बीमारियों को बढ़ाती है, बल्कि कई और गंभीर समस्याओं का भी कारण बनती है। आइए इस लेख में हम इसी के बारे में जानते हैं कि एक गतिहीन जीवनशैली हमारे स्वास्थ्य में क्या-क्या नकारात्मक बदलाव ला सकती है और इन बदलावों से कैसे बचा जा सकता है।

    मोटापा और दिल की बीमारियां

    सेडेंटरी लाइफस्टाइल का सबसे बड़ा और सीधा असर हमारे वजन पर पड़ता है। जब हम कम शारीरिक गतिविधि करते हैं, तो शरीर में कैलोरी बर्न नहीं हो पाती, जिससे मोटापा बढ़ता है। मोटापा अपने आप में कई बीमारियों का कारण है, जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल। ये सभी मिलकर हृदय रोगों का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं।

    हड्डियों और मांसपेशियों का कमजोर होना

    शारीरिक गतिविधि की कमी से हमारी हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। जब हम व्यायाम नहीं करते हैं, तो हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह मांसपेशियां भी जब निष्क्रिय रहती हैं तो इनकी लचीलापन भी कम हो जाता है, जिससे जोड़ों में दर्द और अकड़न की समस्या हो सकती है।

    मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर

    सेडेंटरी लाइफस्टाइल का असर हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। शारीरिक गतिविधि न करने से दिमाग में एंडोर्फिन जैसे 'हैप्पी हार्मोन' का उत्पादन कम हो जाता है। इससे तनाव, अवसाद और चिंता जैसी समस्याएं हावी सकती हैं। एक जगह बैठे रहने से सामाजिक संपर्क भी कम होता है, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

    क्या करें?

    इस जीवनशैली से बचने के लिए, अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव लाएं। हर घंटे काम से 5 मिनट का ब्रेक लें और थोड़ा टहलें। लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें। सुबह या शाम में हर दिन 30 मिनट की वॉक या योगा जरूर करें। अगर संभव हो तो ऑफिस में स्टैंडिंग डेस्क का उपयोग करें। इन छोटी-छोटी आदतों को अपनाकर आप अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं।

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