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    September 29, 2025

    समय पर जांच जरूरी, वरना बच्चों में दृष्टि कमजोर होने का खतरा

    दुनियाभर में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है और इसका असर बच्चों की सेहत पर गंभीर रूप से पड़ रहा है। जिस हवा में हम रोजाना सांस लेते हैं, उसमें हानिकारक गैसों और रसायनों का स्तर लगातार बढ़ रहा है। मेडिकल रिपोर्ट्स बताती हैं कि लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों में हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारियां और कैंसर जैसी क्रॉनिक बीमारियों का जोखिम अधिक होता है।

    आंखों पर प्रदूषण का असर

    विशेषज्ञों का कहना है कि हवा में मौजूद छोटे कण (PM2.5) और जहरीली गैसें बच्चों की आंखों के लिए भी खतरा हैं। इनसे आंखों में जलन, लालिमा, सूखापन और सूजन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। लगातार प्रदूषित हवा में रहने से आंखों की नमी कम हो जाती है और कॉर्निया प्रभावित होता है, जिससे दृष्टि कमजोर हो सकती है और गंभीर मामलों में अंधापन का खतरा भी बढ़ जाता है।

    बच्चों में एलर्जी और मायोपिया

    छोटे बच्चों की आंखें संवेदनशील होती हैं और प्रदूषण के छोटे-छोटे कण भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि वायु प्रदूषण बच्चों में एलर्जी से जुड़ी आंखों की बीमारियां जैसे एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस बढ़ा रहा है।

    साफ हवा न केवल फेफड़ों बल्कि बच्चों की आंखों के लिए भी जरूरी है। अध्ययन में खुलासा हुआ है कि प्रदूषण बच्चों में निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) का प्रमुख कारण बन रहा है। प्रदूषण आंखों में तनाव और सूजन पैदा करता है और सूरज की रोशनी के संपर्क को कम करता है, जिससे आंख का आकार बदल सकता है और मायोपिया तेजी से बढ़ सकता है।

    मायोपिया का बढ़ता खतरा

    आज दुनिया में लगभग एक तिहाई बच्चे और किशोर मायोपिया से प्रभावित हैं। इस समस्या में बच्चे दूर की चीजें ठीक से नहीं देख पाते और उम्र बढ़ने के साथ यह गंभीर हो सकती है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि दूषित हवा बच्चों की आंखों के कॉर्निया और आंख के आकार को प्रभावित करती है।

    भारत में भी बच्चों में मायोपिया की समस्या तेजी से बढ़ रही है। एम्स और एलवी प्रसाद आई इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में 10–15 साल के बच्चों में मायोपिया के मामले पिछले दस वर्षों में दोगुने हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण के साथ मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग भी इस समस्या को बढ़ा रहा है।

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