Gen Z यानी 1997 के बाद जन्मी पीढ़ी को आमतौर पर युवा, ऊर्जावान और ताक़तवर माना जाता है, लेकिन बदलती लाइफस्टाइल उनकी सेहत पर भारी पड़ रही है। घंटों स्क्रीन के सामने बैठना, देर रात तक जागना, फास्ट फूड का बढ़ता चलन और सोशल मीडिया का मानसिक दबाव इस पीढ़ी को उम्र से पहले ही थका रहा है। डॉक्टरों और हेल्थ रिपोर्ट्स के मुताबिक Gen Z में पीठ दर्द, गर्दन की जकड़न, एंग्जायटी, नींद की कमी और पाचन से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि Gen Z की परेशानी उम्र या पीढ़ी नहीं, बल्कि उनकी जीवनशैली है। लगातार बैठे रहने और शारीरिक गतिविधि की कमी ने युवाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर बना दिया है। ऐसे में योग एक ऐसा माध्यम है, जो शरीर और मन दोनों को संतुलन सिखा सकता है। जब शरीर और दिमाग दोनों थक जाएं, तो स्क्रीन से दूर होकर श्वास और योग मुद्राओं पर ध्यान देना बेहद जरूरी हो जाता है।
आज की युवा पीढ़ी में गर्दन और कंधों का दर्द, कमर व रीढ़ की अकड़न, एंग्जायटी, बेचैनी, ओवरथिंकिंग, नींद न आना और पाचन कमजोर होना आम समस्याएं बन चुकी हैं। इन समस्याओं से राहत पाने के लिए कुछ आसान योगासन बेहद प्रभावी माने जाते हैं।
ताड़ासन उन युवाओं के लिए फायदेमंद है, जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं। यह रीढ़ की जकड़न को दूर करता है, पोश्चर सुधारता है और शरीर में ऊर्जा का संचार करता है। भुजंगासन पीठ और कंधों के दर्द में राहत देता है और फेफड़ों को मजबूत बनाता है, जिससे तनाव भी कम होता है।
मानसिक थकान और एंग्जायटी से जूझ रहे युवाओं के लिए बालासन बेहद उपयोगी है। यह नर्वस सिस्टम को शांत करता है और दिमाग को आराम देता है। वहीं पवनमुक्तासन पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और गैस व ब्लोटिंग जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है, जो खराब लाइफस्टाइल के कारण आम हो चुकी हैं।
इसके अलावा अनुलोम-विलोम प्राणायाम Gen Z के लिए सबसे असरदार अभ्यासों में से एक है। इससे ऑक्सीजन सप्लाई बेहतर होती है, नींद की गुणवत्ता सुधरती है और ओवरथिंकिंग व स्ट्रेस पर नियंत्रण मिलता है।
अगर Gen Z अपनी दिनचर्या में रोज़ कुछ समय योग को दे, तो न सिर्फ शारीरिक दर्द से राहत मिल सकती है, बल्कि मानसिक तनाव भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। योग इस नई पीढ़ी के लिए एक हेल्दी और संतुलित जीवन की कुंजी साबित हो सकता है।
