सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार के एक कर्मचारी को 2021 में दर्ज भ्रष्टाचार मामले में अग्रिम जमानत दे दी है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई और उसकी कार्यप्रणाली को असामान्य करार दिया।
क्या है पूरा मामला?
गुरसेवक सिंह, जो पंजाब सरकार में अधिकारी हैं, के खिलाफ 2021 में एक भ्रष्टाचार का मामला दर्ज हुआ था। उन पर रिश्वत लेने का आरोप है। इस मामले में चार साल तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई। 2025 में गुरसेवक सिंह ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की। इसी मामले में एक अन्य आरोपी, जिस पर रिश्वत की रकम लेने का सीधा आरोप था, को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी।
हाईकोर्ट का अजीब आदेश
मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने जहां एक आरोपी को राहत दी, वहीं गुरसेवक सिंह की अर्जी को खारिज कर दिया। इतना ही नहीं, कोर्ट ने पंजाब के डीजीपी से यह भी पूछा कि चार साल में आरोपपत्र क्यों दाखिल नहीं किया गया और आरोपी को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस रवैये को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, 'या तो हाईकोर्ट को अग्रिम जमानत मंजूर करनी चाहिए थी या फिर याचिका को पूरी तरह खारिज करना चाहिए था। लेकिन यहां हाईकोर्ट ने एक आरोपी को जमानत दे दी और दूसरे को मना कर दिया, जबकि उस पर रिश्वत लेने का सीधा आरोप भी नहीं था। यह बहुत ही असामान्य है।'
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश बहुत संक्षिप्त और असामान्य था। जस्टिस पारदीवाला ने यह भी सवाल उठाया कि जब चार साल तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो हाईकोर्ट ने यह पूछताछ क्यों की कि उसे अब तक क्यों नहीं पकड़ा गया। उन्होंने कहा, 'यह तथ्य कि आरोपी को चार साल तक गिरफ्तार नहीं किया गया, अपने आप में अग्रिम जमानत देने का मजबूत आधार था।'
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए इंतजार नहीं किया कि न्याय में देरी न हो। शीर्ष अदालत ने गुरसेवक सिंह को अग्रिम जमानत दी। आदेश में कहा गया कि अगर उन्हें गिरफ्तार किया जाता है, तो आर्थिक अपराध शाखा, लुधियाना के जांच अधिकारी की तरफ से तय शर्तों के आधार पर तुरंत जमानत पर रिहा किया जाए।
