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    December 18, 2025

    बीमा सेक्टर में 100% FDI का रास्ता साफ: विदेशी निवेश से पूंजी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी

    बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) की 2023-24 की वार्षिक रिपोर्ट ने बीमा क्षेत्र की कमजोर स्थिति को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में बीमा सेवाओं की पहुंच घटकर केवल 3.7 प्रतिशत रह गई है, जो एक साल पहले 4 प्रतिशत थी। यह लगातार दूसरा साल है जब बीमा पेनिट्रेशन में गिरावट दर्ज की गई है। जीवन बीमा की स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां 2022-23 में 3 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में यह 2.8 प्रतिशत पर आ गई।

    भारत में बीमा सेवाओं की सबसे अधिक पहुंच 2021-22 में 4.2 प्रतिशत दर्ज की गई थी, लेकिन इसके बाद से लगातार गिरावट देखने को मिली है। वैश्विक स्तर पर जहां बीमा पेनिट्रेशन औसतन करीब 7 प्रतिशत है, वहीं भारत इससे काफी पीछे है। इससे साफ है कि देश की बड़ी आबादी आज भी बीमा सुरक्षा से बाहर है।

    बीमा सेवाओं की कम पहुंच को देखते हुए सरकार लंबे समय से इस सेक्टर में सुधार के प्रयास कर रही है। इसी क्रम में 2000 में बीमा क्षेत्र में 26 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति दी गई थी। 2015 में इसे बढ़ाकर 49 प्रतिशत और 2021 में 74 प्रतिशत कर दिया गया। अब 2025 में सरकार ने इसे बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दिया है। सरकार का मानना है कि इससे बीमा कंपनियों में पूंजी निवेश बढ़ेगा और सेवाओं का विस्तार तेज होगा।

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि 100 प्रतिशत FDI से बीमा सेक्टर को नई पूंजी मिलेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और उच्च व मध्यम वर्ग के बीच बीमा उत्पादों को लोकप्रिय बनाने में मदद मिलेगी। खासतौर पर युवाओं और जेन-जी में बीमा को लेकर जागरूकता बढ़ाने में विदेशी कंपनियों की आक्रामक मार्केटिंग रणनीतियां कारगर साबित हो सकती हैं।

    स्वास्थ्य बीमा की बात करें तो लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार भारत में केवल 29.8 प्रतिशत महिलाएं और 33.3 प्रतिशत पुरुष ही किसी न किसी हेल्थ इंश्योरेंस का लाभ ले रहे हैं। इनमें भी बड़ी संख्या उन लोगों की है जो संगठित क्षेत्र में काम करते हैं और जिन्हें कंपनी के जरिए बीमा मिलता है। व्यक्तिगत तौर पर स्वास्थ्य बीमा लेने वालों की संख्या अभी भी बेहद कम है।

    इस आंकड़े में आयुष्मान भारत योजना का बड़ा योगदान है, जिसके तहत गरीब परिवारों को 5 से 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है। हालांकि संगठित क्षेत्र और आयुष्मान योजना को छोड़ दिया जाए तो निजी बीमा कंपनियों से स्वास्थ्य बीमा लेने वाले लोगों की संख्या काफी सीमित है।

    बीमा सेवाओं का विस्तार अभी भी मुख्य रूप से शहरी इलाकों तक सीमित है। ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा कवरेज बेहद कम है। सरकार का मानना है कि 100 प्रतिशत विदेशी निवेश से नई कंपनियां, बेहतर तकनीक और व्यापक नेटवर्क विकसित होंगे, जिससे बीमा सेवाएं ग्रामीण और पिछड़े इलाकों तक पहुंच सकेंगी। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में बीमा पेनिट्रेशन को तेजी से बढ़ाया जाए और देश की बड़ी आबादी को वित्तीय सुरक्षा के दायरे में लाया जाए।

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