दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बेहद गंभीर स्थिति में बना हुआ है। गुरुवार-शुक्रवार की मध्यरात्रि को दिल्ली का औसत एक्यूआई 570 अंक रहा। दिन होने के बाद इसमें कुछ गिरावट आई और यह 370 के आसपास रहा, लेकिन प्रदूषण का यह स्तर भी बहुत खराब श्रेणी में आता है। प्रदूषण की इस गंभीर स्थिति के बाद भी इसे रोकने का कोई स्थायी उपाय दिखाई नहीं दे रहा है। दिल्ली सरकार प्रदूषण पर लगाम लगाने के विभिन्न उपाय कर रही है, लेकिन महाकाय प्रदूषण के सामने इस पर नियंत्रण के हर उपाय बौने साबित हो रहे हैं।
ठंड का मौसम प्रदूषण की दृष्टि से बेहद गंभीर हो जाता है, लेकिन वर्षा के सीजन के कुछ दिनों को छोड़ दें तो पूरे साल भर दिल्ली-एनसीआर के इलाके में प्रदूषण की स्थिति लगातार बनी रहती है। गर्मी के मौसम में जब हवा का बहाव सबसे तेज होता है, उस समय भी विभिन्न कारणों से दिल्ली-एनसीआर को प्रदूषण से राहत नहीं मिलती। इसे देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि अब प्रदूषण से निपटने के उपाय स्थायी तौर पर पूरे साल भर और लगातार चलना चाहिए। प्रदूषण से केवल तभी कारगर तरीके से निपटा जा सकता है।
चीन के सुझाए उपाय कितने कारगर
दिल्ली के गंभीर प्रदूषण के बीच चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया है कि उनके देश ने किस तरह अपने औद्योगिक शहरों में प्रदूषण से निजात पाई है। चीन ने इसके लिए लगातार प्रयास किए और लगभग दस वर्षों के बाद अब इन शहरों का एक्यूआई सौ अंक से भी नीचे रहता है। इसे लेकर एक बहस शुरू हो गई है कि क्या भारत चीन की तरह के प्रयास लागू कर सकता है।
चीन के उपाय भारत में लागू करना पूरी तरह संभव नहीं
चीन के कुछ उपाय तो लागू करने से दिल्ली को भी प्रदूषण से राहत मिलने में सहायता मिल सकती है। जैसे वाहनों को इलेक्ट्रिक करना, भारी उद्योगों को मुख्य शहर से बाहर ले जाना। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने से भी प्रदूषण से निपटने में मदद मिल सकती है। लेकिन चीन के हर उपाय भारत जैसे देश में सहज रूप से लागू नहीं किए जा सकेंगे। उदाहरण के तौर पर चीन ने जिस तरह शंघाई और आसपास के शहरों की एकीकृत एजेंसी बनाकर उसके नेतृत्व में प्रदूषण से निपटने के उपाय किए हैं, उसी तरह से दिल्ली और आसपास के राज्यों के दिल्ली से सटे शहरों का एकीकृत मॉडल खड़ा करना आसान नहीं है।
दिल्ली-एनसीआर एकीकृत बोर्ड का प्रस्ताव आज तक शुरू नहीं हुआ
दिल्ली-एनसीआर की कई समस्याओं को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर एकीकृत बोर्ड बनाने का एक प्रस्ताव वर्ष 1985 में पेश किया गया था। इसका उद्देश्य था कि आसपास के इलाकों की आवश्यकताओं को साथ रखते हुए सार्वजनिक परिवहन प्रणाली विकसित की जाए जिससे भारी जाम से निजात मिल सके। लेकिन यह प्रस्ताव आज तक सिरे नहीं चढ़ पाया। अब लगभग 41 वर्षों के बाद दिल्ली सरकार ने एकीकृत परिवहन व्यवस्था स्थापित करने की संभावनाओं को तलाशने के लिए एक कमेटी का गठन किया है।
