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    December 23, 2025

    कांग्रेस का आरोप अरावली के अस्तित्व से खिलवाड़ कर रही है सरकार

    जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि सरकार अरावली को नए सिरे से परिभाषित करने पर क्यों अड़ी है और इससे आखिर किसे लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार खनन के लिए केवल 0.19 प्रतिशत क्षेत्र का हवाला देकर जनता को गुमराह कर रही है। उनका आरोप है कि केंद्र ने 34 जिलों के कुल क्षेत्रफल को आधार बनाकर गणना की, जबकि आकलन केवल वास्तविक अरावली क्षेत्र के आधार पर होना चाहिए था।

    रमेश ने चेतावनी दी कि अरावली की नई परिभाषा में 100 मीटर से ऊंची पहाड़ियों को ही शामिल करने से दिल्ली-एनसीआर के कई पहाड़ी इलाके संरक्षण के दायरे से बाहर हो जाएंगे। इससे भू-माफिया और रियल एस्टेट गतिविधियों को बढ़ावा मिलने का खतरा है, जो पर्यावरण के लिए गंभीर नुकसानदेह हो सकता है।

    वहीं केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस के आरोपों को भ्रामक बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार अरावली के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। भूपेंद्र यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि जिनके शासनकाल में राजस्थान में अवैध खनन फलता-फूलता रहा, वे आज पर्यावरण की दुहाई दे रहे हैं।

    गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय की सिफारिश पर अरावली की नई कानूनी परिभाषा को स्वीकार किया है। इस नई परिभाषा के तहत 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों के संरक्षण को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिसे विपक्षी दल पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा मान रहे हैं।

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