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    December 21, 2025

    केंद्र का स्पष्टीकरण: अरावली की परिभाषा नहीं बदली, खनन बढ़ाने के आरोप निराधार

    दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत शृंखलाओं में शामिल अरावली पर्वतमाला को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने रविवार को स्पष्ट किया कि अरावली की परिभाषा में कोई बदलाव नहीं किया गया है और बड़े पैमाने पर खनन की अनुमति देने से जुड़े आरोप पूरी तरह निराधार हैं। केंद्र ने कहा कि इस क्षेत्र में नए खनन लीज पर पहले से ही सुप्रीम कोर्ट की रोक लागू है।

    केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी से तय की गई एक समान परिभाषा के तहत अरावली क्षेत्र का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा ‘सुरक्षित क्षेत्र’ में आएगा, जहां खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

    सरकार ने बताया कि अरावली को लेकर भ्रम उस समय फैला जब सुप्रीम कोर्ट में खनन से जुड़ी एक याचिका पर केंद्र ने जवाब दाखिल किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर ‘सेव अरावली’ अभियान भी शुरू हो गया। केंद्र ने साफ किया कि परिभाषा को राज्यों में प्रमाणित करने का उद्देश्य नियमों का दुरुपयोग रोकना है, न कि खनन को बढ़ावा देना।

    केंद्र के अनुसार राजस्थान, हरियाणा और गुजरात में कानूनी खनन अरावली क्षेत्र के केवल 0.19 प्रतिशत हिस्से में ही होता है, जबकि दिल्ली में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। सरकार ने यह भी कहा कि अरावली के लिए असली खतरा अवैध और अनियंत्रित खनन है, जिसे रोकने के लिए सख्त निगरानी, प्रवर्तन और ड्रोन जैसी तकनीकों के उपयोग की सिफारिश की गई है।

    सरकार ने दोहराया कि यह कहना गलत है कि केवल 100 मीटर से ऊंची पहाड़ियों पर ही रोक लागू होगी, बल्कि पूरे पहाड़ी क्षेत्र और उससे जुड़े इलाकों में खनन पर प्रतिबंध प्रभावी रहेगा।

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