सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश में हुई सीटीईटी परीक्षा में फर्जी उम्मीदवार बैठाने के एक मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने फिल्म 'मुन्नाभाई MBBS' का ज़िक्र करते हुए सख्त टिप्पणी की—
यह टिप्पणी जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने उस आरोपी की याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिस पर 15 दिसंबर 2024 को हुई परीक्षा में प्रॉक्सी सॉल्वर यानी दूसरे व्यक्ति को अपने स्थान पर परीक्षा में बैठाने का आरोप है।
कोर्ट ने क्या कहा?
बेंच ने कहा कि इस तरह की घटनाएं शिक्षा व्यवस्था की साख और अखंडता को नुकसान पहुंचाती हैं और समाज में गलत संदेश देती हैं। अदालत ने इस आधार पर जमानत देने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट पहले ही कर चुका है जमानत खारिज
इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट भी याचिकाकर्ता की जमानत याचिका खारिज कर चुका था। आरोपी ने दावा किया कि वह परीक्षा वाले दिन अस्पताल में भर्ती था और किसी ने उसकी जानकारी के बिना परीक्षा में फर्जी तरीके से भाग लिया।
क्या था मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के एक स्कूल में सीटीईटी परीक्षा के दौरान एक संदिग्ध परीक्षार्थी पकड़ा गया, जिसका बायोमैट्रिक मिलान नहीं हो पाया। बाद में पता चला कि संदीप सिंह पटेल नामक उम्मीदवार की जगह कोई अन्य व्यक्ति परीक्षा में बैठा था।
स्कूल प्रिंसिपल की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ BNS और उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। आरोपी का कहना है कि इस मामले में कुल तीन लोग आरोपित हैं, जिनमें से दो को जमानत मिल चुकी है।
परीक्षाओं में लगातार बढ़ते फर्जीवाड़े
देश भर में पिछले कुछ वर्षों में परीक्षाओं से जुड़ी गड़बड़ियों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है:
- राजस्थान (2018): जेल वार्डन परीक्षा का पेपर लीक, 70 गिरफ्तारियां
- उत्तर प्रदेश (2021): UPTET पेपर लीक, 18.22 लाख अभ्यर्थी प्रभावित
- रीट (राजस्थान): पेपर लीक में 600 से ज्यादा संदिग्ध, 123 शिक्षकों पर FIR
- बिहार (2023): कॉन्स्टेबल भर्ती में पेपर लीक, 62 संदिग्ध
- 2024: यूपी में कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का पेपर लीक, 48 लाख उम्मीदवार प्रभावित
