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    December 13, 2025

    पार्थ पवार के जमीन सौदे पर घमासान, अजित पवार बोले प्रशासनिक स्तर पर हुई बड़ी चूक

    महाराष्ट्र के चर्चित पुणे जमीन विवाद पर उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने अपना रुख साफ कर दिया है। शनिवार को उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी दस्तावेजों का रजिस्ट्रेशन करने की थी, उन्हें कानून के खिलाफ किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं करना चाहिए था। साथ ही संबंधित पक्षों को यह स्पष्ट रूप से बताना चाहिए था कि ऐसा सौदा रजिस्टर नहीं किया जा सकता।

    यह बयान उनके बेटे पार्थ पवार से जुड़े मामले में आया है। पार्थ पवार की कंपनी अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी पर पुणे के मुंधवा इलाके में 40 एकड़ सरकारी जमीन करीब 300 करोड़ रुपये में खरीदने का आरोप है। इस सौदे को लेकर रजिस्ट्रार ने 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी और जुर्माने का नोटिस जारी किया था।

    हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस जमीन सौदे की पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की थी कि एफआईआर में पार्थ पवार का नाम न होना ऐसा आभास देता है, मानो जांच में किसी तरह का संरक्षण दिया जा रहा हो।

    मामले पर बढ़ती सियासी हलचल के बीच अजित पवार ने कहा कि हाल में विधानसभा से पारित बिल का मकसद उनके बेटे को बचाना नहीं है। उन्होंने दोहराया कि गलती रजिस्ट्रेशन से जुड़े अधिकारियों की थी, जिन्हें ऐसे दस्तावेज स्वीकार ही नहीं करने चाहिए थे। यह बिल संवेदनशील मामलों में सीधे राजस्व मंत्री के पास सुनवाई का विकल्प देता है, जो पहले केवल हाईकोर्ट में संभव था।

    गौरतलब है कि इस सौदे में पार्थ पवार की कंपनी में 99 प्रतिशत हिस्सेदारी है, लेकिन उनके नाम पर सीधे कोई दस्तावेज न होने के कारण एफआईआर में उनका नाम शामिल नहीं किया गया। हालांकि, उनके कारोबारी साझेदार और अन्य संबंधित लोगों को आरोपी बनाया गया है।

    वहीं, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि कुछ लेनदेन से राज्य को वित्तीय नुकसान हुआ है, इसलिए इस तरह के मामलों को कानूनी और प्रभावी तरीके से सुलझाने के लिए यह बिल जरूरी था। पूरे मामले ने राज्य में प्रशासनिक जिम्मेदारियों और पारदर्शिता को लेकर नए सिरे से बहस छेड़ दी है।

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