केरल स्थित सबरीमाला मंदिर में चल रहे तीर्थयात्रा सीजन के आधिकारिक आंकड़े शुक्रवार को जारी कर दिए गए। आंकड़ों के मुताबिक, इस सीजन में अब तक दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की कुल संख्या 30 लाख के पार पहुंच चुकी है। हालांकि यह संख्या पिछले साल की तुलना में करीब दो लाख कम दर्ज की गई है।
अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष 25 दिसंबर तक 30 लाख से अधिक श्रद्धालु सबरीमाला पहुंचे हैं, जबकि पिछले साल 23 दिसंबर तक ही यह आंकड़ा पार हो गया था। वर्ष 2024 में 23 दिसंबर तक 30,78,044 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे और 25 दिसंबर तक यह संख्या बढ़कर 32,49,756 हो गई थी। वहीं वर्ष 2023 में इसी तारीख तक करीब 28.42 लाख श्रद्धालु ही दर्शन के लिए पहुंचे थे।
19 नवंबर को उमड़ी सबसे ज्यादा भीड़
इस तीर्थयात्रा सीजन की शुरुआत से ही सबरीमाला में भारी भीड़ देखने को मिली। भीड़ नियंत्रण को लेकर केरल हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद प्रशासन ने वर्चुअल क्यू और स्पॉट बुकिंग व्यवस्था पर सख्त सीमाएं लागू कीं। इस सीजन में सबसे अधिक भीड़ 19 नवंबर को दर्ज की गई, जब एक ही दिन में 1,02,299 श्रद्धालुओं ने भगवान अयप्पा के दर्शन किए। वहीं सबसे कम भीड़ 12 दिसंबर को रही, जब 49,738 श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।
सामान्य दिनों में भी घटी संख्या
अधिकारियों ने बताया कि सामान्य दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या 80 हजार से ऊपर रही, लेकिन पिछले वर्षों की तुलना में इस बार रविवार जैसे अवकाश वाले दिनों में भी अपेक्षाकृत कम भीड़ देखने को मिली। उदाहरण के तौर पर 21 दिसंबर (रविवार) को केवल 61,576 श्रद्धालु ही दर्शन के लिए पहुंचे।
मंडला पूजा के विशेष अवसर को देखते हुए 26 और 27 दिसंबर को वर्चुअल क्यू के माध्यम से दर्शन की अनुमति पाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या क्रमशः 30,000 और 35,000 तक सीमित कर दी गई है। वहीं स्पॉट बुकिंग को भी घटाकर 2,000 कर दिया गया है।
शनिवार रात बंद होंगे कपाट
‘थंका अंकी’ शोभायात्रा के चलते शुक्रवार सुबह से पंपा से श्रद्धालुओं की आवाजाही अस्थायी रूप से प्रतिबंधित की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार सुबह 9 बजे तक 22,039 श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। शनिवार को मंडला पूजा संपन्न होगी, जिसमें भगवान अयप्पा को स्वर्ण वस्त्रों से अलंकृत किया जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 10:10 बजे से 11:30 बजे के बीच है।
मंडला पूजा के बाद शनिवार रात 11 बजे ‘हरिवरासनम’ (भक्ति गीत) के पश्चात मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद मकरविलक्कू उत्सव के लिए 30 दिसंबर को मंदिर को फिर से खोला जाएगा।
