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    January 01, 2026

    सीपीएम का आरोप: वोटर लिस्ट रिविजन से बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थियों पर पड़ रहा असर

    भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता कांति गांगुली ने पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि मतदाता सूची के इस पुनरीक्षण से सबसे अधिक वे हिंदू प्रभावित होंगे, जो बांग्लादेश से पलायन कर पश्चिम बंगाल में आकर बसे हैं।

    गुरुवार को मीडिया से बातचीत में कांति गांगुली ने कहा कि उन्हें मतदाता सूची के एसआईआर को लेकर शुक्रवार को निर्वाचन आयोग द्वारा दस्तावेज़ सत्यापन की सुनवाई के लिए तलब किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस प्रक्रिया के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे जिस तरह से सीमित समय में लागू किया जा रहा है, उस पर गंभीर सवाल हैं।

    ‘मैं एसआईआर के पक्ष में हूं, लेकिन…’

    पूर्व मंत्री कांति गांगुली ने कहा, “मैं एसआईआर के पक्ष में हूं, लेकिन यह बेहद बड़ा और चुनौतीपूर्ण काम है। इसे दो–तीन महीनों में पूरा करना व्यावहारिक नहीं है। भारत जैसे विशाल और घनी आबादी वाले देश में मतदाता सूची को सटीक और भरोसेमंद बनाने के लिए ज्यादा समय दिया जाना चाहिए था।”

    ‘बांग्लादेशी हिंदू सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे’

    गांगुली ने दावा किया कि सुंदरबन क्षेत्र सहित राज्य के कई हिस्सों में बांग्लादेश से आए हिंदुओं की बड़ी आबादी रहती है। उन्होंने कहा, “मैं खुद सुंदरबन इलाके से आता हूं। यहां बड़ी संख्या में बांग्लादेशी हिंदू बसे हुए हैं और इस पुनरीक्षण प्रक्रिया में वही सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।”
    उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने एसआईआर के लिए स्पष्ट और विस्तृत दिशानिर्देश नहीं बनाए, जिससे आम मतदाताओं के बीच भ्रम और गलत धारणाएं फैल रही हैं।

    वाम दलों को नुकसान की आशंका

    कांति गांगुली ने यह भी कहा कि मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण से मजबूत संगठनात्मक ढांचा रखने वाली राजनीतिक पार्टियों को फायदा मिल सकता है, जिसका असर आगामी विधानसभा चुनावों में दिखेगा। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि मौजूदा हालात में वाम दलों को इससे कोई विशेष लाभ नहीं होगा।
    उन्होंने कहा, “जब तक वाम दल जनता का भरोसा दोबारा हासिल नहीं करते, तब तक चुनावी नतीजों में बड़ा बदलाव संभव नहीं है।”

    गौरतलब है कि कांति गांगुली 2001 से 2011 तक सुंदरबन विकास विभाग के मंत्री रह चुके हैं और कुछ समय के लिए खेल एवं युवा कल्याण मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उनका यह बयान पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।

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