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    December 08, 2025

    संसद में देशभक्ति की गूंज: ओम बिरला का संबोधन वंदे मातरम हमारी सभ्यता और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक

    सदन की कार्यवाही शुरू होते ही स्पीकर ओम बिरला ने वंदे मातरम को भारत की आत्मा, एकता, संस्कृति और अदम्य शक्ति का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत आज भी हर भारतीय के हृदय में गहराई से बसता है और इसके शब्दों में भारत की प्रकृति, मातृत्व, सौंदर्य और शक्ति की अद्वितीय एकता प्रतिबिंबित होती है।

    “नए भारत की पीढ़ियों तक पहुंचानी होगी इसकी प्रेरक ऊर्जा” – ओम बिरला

    स्पीकर ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम ने करोड़ों भारतीयों में आजादी की लौ प्रज्वलित की थी। असंख्य क्रांतिकारियों ने अत्याचारों और फांसी का सामना करते हुए भी इसे अपना संबल बनाया। सदन में सांसदों ने मेज थपथपाकर इस विशेष चर्चा का स्वागत किया।
    ओम बिरला ने कहा कि यह बहस केवल औपचारिक चर्चा नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक स्मृति और राष्ट्रभावना को जागृत करने का अवसर है। उन्होंने विश्वास जताया कि सांसदों के विचार इस चर्चा को सत्र का ऐतिहासिक अध्याय बनाएंगे और वंदे मातरम की प्रेरक ऊर्जा आने वाली पीढ़ियों तक और अधिक प्रभाव के साथ पहुंचेगी।

    सदन में नेताओं ने वंदे मातरम की ऐतिहासिक यात्रा, स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका और आधुनिक भारत के लिए इसके संदेश पर अपने विचार रखे।

    “नेहरू और कांग्रेस का बार-बार उल्लेख”

    चर्चा में कांग्रेस के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अक्सर विभिन्न विषयों पर बोलते समय पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस का अनावश्यक रूप से उल्लेख करते हैं।
    उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर पर बहस के दौरान प्रधानमंत्री ने नेहरू का नाम 14 बार और कांग्रेस का 50 बार लिया। संविधान के 75 वर्ष पर हुई चर्चा में नेहरू का नाम 10 बार और कांग्रेस का 26 बार लिया गया।”

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