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    December 24, 2025

    परिणामों से सीखकर ही लिए जा सकते हैं बेहतर और टिकाऊ निर्णय

    कई युवा अपने करियर की शुरुआत में यह मान लेते हैं कि वही निर्णय सही है, जिस पर सभी लोग सहमत हों। सहकर्मियों की हां में हां सुनकर उन्हें लगता है कि फैसला बिल्कुल ठीक है। जबकि सच्चाई यह है कि बेहतर निर्णय अक्सर साफ लक्ष्य, सही आकलन और आत्मविश्वास से लिए जाते हैं, न कि केवल सर्वसम्मति से।

    अच्छे और तेज निर्णय लेने के लिए सबसे पहले यह जरूरी है कि आपका लक्ष्य स्पष्ट हो। यह समझें कि आप क्या हासिल करना चाहते हैं, आपके पास कितना समय है और संभावित जोखिम क्या हैं। जब ये बातें साफ होती हैं, तो निर्णय लेना आसान हो जाता है।

    समस्या और लक्ष्य को स्पष्ट करें

    त्वरित और सही निर्णय के लिए पहले समस्या को ठीक से समझें। खुद से सवाल करें—यह फैसला क्यों लेना है, इसका असर क्या होगा, समय सीमा क्या है और उपलब्ध संसाधन पर्याप्त हैं या नहीं। यदि किसी निर्णय का प्रभाव सीमित है, तो उस पर जरूरत से ज्यादा समय न लगाएं और जल्दी फैसला लेकर आगे बढ़ें।

    ज्यादा विकल्पों में न उलझें

    अक्सर बहुत ज्यादा विकल्प निर्णय को कठिन बना देते हैं। जरूरी जानकारी जुटाएं, लेकिन अत्यधिक शोध में उलझने से बचें। अपने लक्ष्य के अनुसार कुछ स्पष्ट मानदंड तय करें, जैसे लागत, समय या गुणवत्ता। फिर उन विकल्पों को हटा दें जो इन मानदंडों पर खरे नहीं उतरते या जिनमें बड़ा जोखिम हो।

    अपनी समझ और अनुभव पर भरोसा रखें

    निर्णय लेते समय सिर्फ आंकड़ों पर निर्भर न रहें। अपने अनुभव और अंतर्ज्ञान को भी महत्व दें। एक बार फैसला लेने के बाद उस पर पूरे भरोसे के साथ अमल करें। बार-बार उसी पर सोचकर काम को न रोकें।

    नतीजों से सीखें

    हर निर्णय से कुछ न कुछ सीख मिलती है। उसके परिणामों का शांत मन से आकलन करें और उसी सीख के आधार पर आगे बेहतर और आत्मविश्वास से भरे फैसले लेने की आदत विकसित करें।

    जरूरत हो तो सलाह लें

    अगर फैसला बहुत कठिन लगे, तो एक-दो भरोसेमंद और अनुभवी लोगों से सलाह लेना मददगार हो सकता है। लेकिन हर बार सबकी सहमति ढूंढने के बजाय अपनी समझ और सोच पर भरोसा करना सबसे जरूरी है।

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