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    December 29, 2025

    53 साल बाद 10वीं के सहपाठी फिर मिले, क्लासरूम बना यादों का मंच

    पाली जिले के तखतगढ़ में सोमवार को एक अनोखा और भावुक दृश्य देखने को मिला, जब 50 से 60 वर्ष की उम्र के पूर्व छात्र एक बार फिर अपने पुराने स्कूल की कक्षा में बैठे और बच्चों की तरह “यस सर” कहते हुए हाजिरी लगवाई। किसी के बाल सफेद हो चुके थे, किसी को घुटनों में दर्द था और किसी के सिर से बाल गायब थे, लेकिन जोश और उत्साह बिल्कुल छात्र जीवन जैसा नजर आया।

    53 साल बाद हुआ सत्र 1972–73 के छात्रों का मिलन

    संघवी केसरी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में सत्र 1972–73 के छात्रों का 53 साल बाद स्नेह मिलन समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान 10वीं कक्षा में साथ पढ़ने वाले 24 पूर्व छात्र एकत्रित हुए और उन्हीं कक्षाओं में बैठकर पढ़ाई के दिनों की यादों को फिर से जीवंत किया।

    पुराने गुरु से मिलकर भावुक हुए शिष्य

    पूर्व शिक्षक एवं सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी दीपाराम जीनगर ने कहा कि ऐसे मिलन समारोहों से जहां पुरानी स्मृतियां ताजा होती हैं, वहीं शिष्यों की उन्नति देखकर गुरु का मान भी बढ़ता है। उन्होंने सभी पूर्व छात्रों की उपलब्धियों की सराहना की।

    पहचान में लगी मशक्कत, फिर गले मिले दोस्त

    आधी सदी बाद जब पुराने दोस्त आमने-सामने आए तो शुरुआत में एक-दूसरे को पहचानना आसान नहीं रहा। बदले चेहरे और उम्र के असर के कारण कई बार 5–7 लोगों को मिलकर किसी दोस्त की पहचान करनी पड़ी। पहचान होते ही सभी खुशी से एक-दूसरे के गले मिले और स्कूल जीवन के किस्सों पर ठहाके गूंज उठे।

    सेवा कार्य करने का लिया संकल्प

    मिलन समारोह के दौरान सभी पूर्व छात्रों ने संकल्प लिया कि वे जहां भी रहेंगे, प्रत्येक माह पीड़ित मानवता की सेवा से जुड़ा कोई न कोई कार्य अवश्य करेंगे।

    प्रधानाचार्य ने बताया कि विद्यालय का मुख्य सभा भवन वर्तमान में जर्जर अवस्था में है। यदि 1972–73 बैच द्वारा इसके जीर्णोद्धार में सहयोग किया जाता है, तो यह विद्यालय और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी उपहार होगा।

    पूर्व विद्यार्थियों ने साझा किए अनुभव

    पूर्व विद्यार्थी उत्तम सांकरिया ने कहा कि हम सभी की इच्छा थी कि 50 साल पुरानी यादें फिर से ताजा हों, और यह कार्यक्रम पूरी तरह सफल रहा। हमारी प्रेरणा है कि आने वाली पीढ़ी भी अपने विद्यालय और साथियों से जुड़ाव बनाए रखे।

    इस स्नेह मिलन समारोह ने यह साबित कर दिया कि दोस्ती और गुरु-शिष्य का रिश्ता समय और उम्र की सीमाओं से परे होता है। दशकों बाद भी वही अपनत्व, वही सम्मान और वही भावनाएं देखने को मिलीं।

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