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    November 14, 2025

    जीत का उत्सव और संगठन में मतभेद, जैसलमेर कांग्रेस दो हिस्सों में बंटी

    \हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और बिहार में लगातार चुनाव हारने के बाद राजस्थान में अंता विधानसभा का उपचुनाव जीतना कांग्रेस के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। लेकिन जैसलमेर कांग्रेस इस जश्न के मौके पर भी एकजुट नजर नहीं आई। पार्टी के नेता अलग-अलग मंचों पर जीत का जश्न मनाते दिखे, जिससे संगठन में दो धड़ों का पता चलता है।

    दो धड़े, अलग-अलग जश्न:

    • कांग्रेस अध्यक्ष उम्मेद सिंह तंवर कांग्रेस कार्यालय में मीडिया संवाद कर रहे थे, मिठाई बाँट रहे थे और पटाखे चला रहे थे।
    • वहीं पूर्व कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद अपने आवास पर अलग से मीडिया को संबोधित कर रहे थे।

    संगठन में रस्साकशी और जातीय असर:
    जैसलमेर कांग्रेस दो धड़ों में बंटी हुई है।

    • एक गुट का नेतृत्व करते हैं पूर्व कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद, जो मुख्य रूप से जैसलमेर शहर के मुस्लिम वोटरों पर प्रभाव रखते हैं।
    • दूसरा गुट है पूर्व विधायक रूपाराम धनदेव का, जो पोकरण क्षेत्र में मेघवाल वोट बैंक पर पकड़ बनाए हुए हैं।

    सालेह मोहम्मद अपने छोटे भाई अमरदीन फकीर को अध्यक्ष पद पर लाना चाहते हैं। अमरदीन फकीर वही हैं जिन्होंने अपने भाई के कैबिनेट मंत्री रहते हुए कांग्रेस का टिकट नहीं पाने के बावजूद निर्दलीय चुनाव लड़ा था। वहीं, रूपाराम गुट का तर्क है कि पार्टी में सभी प्रमुख पद एक ही परिवार या गुट के हाथ में नहीं होने चाहिए। रूपाराम ने अपनी बेटी को जिला प्रमुख बना रखा है, जिससे यह राजनीतिक रस्साकशी और बढ़ गई है।

    राजनीतिक जमीनी स्थिति:
    दोनों गुटों के नेता अपने-अपने क्षेत्रों में अच्छी खासी पकड़ बनाए हुए हैं। सालेह मोहम्मद शहर के मुस्लिम वोटरों पर असर रखते हैं, जबकि रूपाराम धनदेव पोकरण क्षेत्र में मेघवाल वोट बैंक पर प्रभाव रखते हैं। इन मतभेदों के चलते जैसलमेर कांग्रेस का संगठन अभी भी एक झंडे के नीचे नहीं दिख रहा। उपचुनाव की जीत के बावजूद यह फूट पार्टी के लिए भविष्य में चुनौती बन सकती है।

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