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    November 08, 2025

    करोड़ों रुपये के घोटाले में कार्रवाई न करने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने एसीबी से मांगा जवाब

    राजस्थान उच्च न्यायालय ने राजकॉम्प के अंतर्गत लीगल मेट्रोलॉजी और ई-पीडीएस प्रोजेक्ट्स में हुए करोड़ों रुपए के फर्जीवाड़ों के मामलों में कार्रवाई न करने और अधिकारियों को बचाने के आरोपों पर एसीबी को नोटिस जारी किए हैं। यह आदेश पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।

    संस्था के अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी ने अदालत को बताया कि राजकॉम्प के अधिकारी आर.सी. शर्मा, तपन कुमार और कौशल सुरेश गुप्ता ने मिलीभगत कर इन दोनों प्रोजेक्ट्स में अपनी पसंदीदा फर्मों को करोड़ों रुपये का लाभ पहुंचाया।

    लीगल मेट्रोलॉजी प्रोजेक्ट में गड़बड़ी

    भंडारी ने कहा कि लीगल मेट्रोलॉजी प्रोजेक्ट में दो व्यक्तियों को 2020 तक ₹3 लाख मासिक वेतन पर नियुक्त किया गया था। लेकिन अधिकारी आर.सी. शर्मा ने व्हाइटनर लगाकर उनकी सेवा अवधि मार्च 2022 तक बढ़ा दी, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ।

    ई-पीडीएस प्रोजेक्ट में फर्जी हस्ताक्षरों से भुगतान

    इसी तरह, ई-पीडीएस प्रोजेक्ट के तहत उदयपुर जिले में पॉइंट ऑफ सेल मशीनों की सप्लाई और रखरखाव का कार्य लिंकवेल कंपनी को दिया गया। इस कंपनी ने जिला रसद अधिकारी (डीएसओ) उदयपुर के फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर वर्षों तक करोड़ों रुपये का भुगतान उठाया।
    सूचना के अधिकार (RTI) के तहत डीएसओ ने ऐसे किसी भी प्रमाणपत्र को जारी करने से इनकार किया।

    टोंक जिले में भी एनालॉजिक्स कंपनी को कार्यादेश दिया गया, जिसने इसी तरह अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षरों से भुगतान उठाए। आरटीआई के माध्यम से यह भी पुष्टि हुई कि ऐसे कोई दस्तावेज टोंक जिला अधिकारियों द्वारा जारी नहीं किए गए।

    एसीबी पर लापरवाही के आरोप

    संस्था के सदस्य डॉ. टी.एन. शर्मा ने बताया कि इन गंभीर मामलों में एसीबी ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की।
    इसके बजाय एजेंसी ने मामले को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 17-ए के तहत जांच स्वीकृति के लिए भेज दिया, ताकि जांच लंबित रहे।
    अधिवक्ता भंडारी ने तर्क दिया कि धारा 17-ए केवल नीतिगत निर्णयों (पॉलिसी डिसीजन) पर लागू होती है, जबकि यह मामला स्पष्ट वित्तीय भ्रष्टाचार का है, जिसमें स्वीकृति की आवश्यकता नहीं थी।

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