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    November 18, 2025

    राजधानी जयपुर में गौ-हत्या रोकने को लेकर संतों का महासम्मेलन, सरकार पर कार्रवाई न करने का आरोप

    जयपुर में सोमवार को देशभर के करीब 300 साधु–संत, शंकराचार्य और महामंडलेश्वर जुटे। जेएलएन मार्ग स्थित होटल क्लार्क आमेर में आयोजित इस बैठक का नेतृत्व महामंडलेश्वर कम्प्यूटर बाबा ने किया। बैठक का मुख्य उद्देश्य गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध और गोमाता को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाने की मांग था।

    “गोमाता भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं”

    कार्यक्रम में कम्प्यूटर बाबा ने कहा कि गोमाता भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। आज उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय है—वे सड़कों पर भटक रही हैं, भूख-प्यास से मर रही हैं और दुर्घटनाओं का शिकार हो रही हैं। यह केवल सरकार की नहीं बल्कि पूरे समाज की सामूहिक असफलता है।
    उन्होंने साफ कहा कि यदि सरकार ने मांगों को पूरा नहीं किया तो आगामी मार्च में देशभर के साधु-संत दिल्ली में अनिश्चितकालीन अहिंसक आंदोलन शुरू करेंगे।

    गौ–रक्षा को लेकर प्रस्ताव पारित

    बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि केंद्र सरकार को गोमाता को राष्ट्र माता घोषित करना चाहिए और गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना चाहिए। प्रस्ताव में कहा गया कि अगर सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो अगले महीने देशभर से हजारों साधु-संत और करोड़ों गौभक्त दिल्ली कूच करेंगे और धरना तब तक जारी रहेगा जब तक आधिकारिक घोषणा नहीं हो जाती।

    “भारत अपनी आत्मा की रक्षा नहीं कर सकता”

    आयोजक देवकीनंदन पुरोहित ने कहा कि भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की संपूर्ण संरचना गोमाता पर आधारित है। उनके अनुसार—“गोमाता को राष्ट्र माता का दर्जा दिए बिना भारत अपनी आत्मा की रक्षा नहीं कर सकता।”

    संत समाज का ऐलान—आंदोलन शांतिपूर्ण पर निर्णायक

    अन्य संतों ने कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन निर्णायक होगा। देश के नागरिकों से भी इस अभियान का समर्थन करने की अपील की गई।

    सम्मेलन में शामिल प्रमुख संत

    कार्यक्रम में जगद्गुरु शंकराचार्य त्रिकालभांता, महामंडलेश्वर अजय दास, प्रकाशानंद, आनंदेश्वर महाराज, भवानी मां, तनीषा सनातनी, प्रेमपुरी, भोलागिरी, मधुरदास, कपिल मुनि, रामसेवक दास, कालिकानंद, अन्नगिरि, राघवेन्दानन्द, चंदन दास, खड़ेश्वरी, शैलेशनंद, प्रवीण दास, बाली बाबा, स्वामी अजय योगी, स्वामी हरिओम, मोलागिरी, सूरज गिरी सहित अनेक संत उपस्थित रहे।

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