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    December 08, 2025

    सुप्रीम कोर्ट का फैसला: आसाराम केस पीड़िता की अंतरिम जमानत रद्द करने की याचिका नहीं हुई स्वीकार

    सुप्रीम कोर्ट ने रेप केस में सजा काट रहे आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से मिली छह महीने की अंतरिम जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया है। जस्टिस पामिडिघंटम नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने जोधपुर पॉक्सो केस में पीड़िता द्वारा दायर स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) को खारिज करते हुए मामले का निस्तारण कर दिया।

    पीड़िता ने 21 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में SLP दाखिल की थी, जिसमें राजस्थान राज्य और आसाराम उर्फ आशुमल को प्रतिवादी बनाया गया था। यह याचिका क्रिमिनल लॉ कैटेगरी के तहत ‘बच्चों के खिलाफ अपराध व पॉक्सो एक्ट 2012’ श्रेणी में दर्ज हुई। सोमवार को हुई सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।

    हाईकोर्ट की अंतरिम जमानत के खिलाफ लगाई थी SLP

    राजस्थान हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर को आसाराम को मेडिकल आधार पर छह महीने की अंतरिम जमानत दी थी। इस आदेश को चुनौती देने के लिए पीड़िता की ओर से 29 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में एप्लिकेशन दाखिल की गई, जिसमें SLP दायर करने की अनुमति और विवादित आदेश की सर्टिफाइड कॉपी पेश करने जैसी मांगें शामिल थीं।

    इस बीच आसाराम ने 3 नवंबर को एडवोकेट निशांत बिश्नोई के माध्यम से कैवियट दाखिल कर दी थी, जो 24 नवंबर को केस से लिंक हुई। इसका उद्देश्य यह था कि सुप्रीम कोर्ट बिना सुने कोई एकतरफा आदेश न दे सके। 8 दिसंबर को यह मामला बेल मैटर्स श्रेणी में सूचीबद्ध हुआ, जहां पीड़िता की ओर से एडवोकेट अल्जो के. जोसेफ और आसाराम की ओर से बिश्नोई ने पक्ष रखा।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश का मतलब

    ऑर्डर में लिखे “Delay Condoned” का अर्थ है कि कोर्ट ने याचिका देरी से दाखिल होने पर तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया। वहीं “Matter Dismissed” का मतलब है कि मेरिट पर सुनवाई के बाद राहत देने से इनकार कर दिया गया। इसका सीधा असर यह है कि हाईकोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई दखल नहीं दिया।

    सभी लंबित आवेदन भी निपटे, हाईकोर्ट का आदेश बरकरार

    सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया कि “including all pending IAs”— यानी पीड़िता की ओर से दायर सभी इंटरिम एप्लिकेशन, जिनमें अंतरिम जमानत रद्द करने से संबंधित आवेदन भी शामिल थे, एक साथ खारिज माने जाएंगे।
    इसका मतलब है कि 29 अक्टूबर 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा दी गई अंतरिम जमानत फिलहाल यथावत रहेगी, और मुख्य अपील का फैसला अब हाईकोर्ट ही करेगा।

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