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    September 20, 2025

    28 सितंबर को आएंगे DPDP एक्ट के नियम, डेटा सुरक्षा कानून के अहम प्रावधानों पर एक नज़र

    केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को बताया कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) नियम तैयार हो चुके हैं और 28 सितंबर तक जारी कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन नियमों को लाने से पहले व्यापक परामर्श प्रक्रिया पूरी की गई है। मंत्री एआई इंपैक्ट समिट के प्री-इवेंट में बोल रहे थे।

    क्यों लाया गया यह कानून?

    आज लगभग हर व्यक्ति ऑनलाइन सेवाओं जैसे बैंकिंग, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स का इस्तेमाल करता है। इस दौरान नाम, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल और वित्तीय जानकारी जैसी निजी सूचनाएं कंपनियों तक पहुंचती हैं। डेटा लीक या दुरुपयोग से बचाने के लिए यह कानून बनाया गया है, ताकि डिजिटल दुनिया में नागरिकों की प्राइवेसी की गारंटी दी जा सके।

    कानून की प्रमुख बातें

    • सहमति जरूरी: कंपनियों को किसी भी नागरिक का डेटा इस्तेमाल करने से पहले स्पष्ट सहमति लेनी होगी।
    • भाषा का विकल्प: सहमति भारत की 22 भाषाओं में से किसी में भी दी जा सकती है।
    • डेटा का उद्देश्य: कंपनियों को बताना होगा कि डेटा क्यों लिया जा रहा है और उसका इस्तेमाल कहां होगा।
    • लीक की सूचना: किसी भी डेटा लीक की स्थिति में कंपनियों को तुरंत यूजर्स और नियामक संस्था को जानकारी देनी होगी।
    • बच्चों की सुरक्षा: 18 साल से कम उम्र के बच्चों के डेटा को लेकर विशेष प्रावधान, ताकि टारगेटेड विज्ञापनों से बचाया जा सके।
    • नागरिकों के अधिकार: नागरिक अपने डेटा को देख सकते हैं, सुधार सकते हैं, हटवा सकते हैं और दी गई सहमति वापस ले सकते हैं।
    • निगरानी तंत्र: अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड (DPB) बनाया जाएगा।

    मीडिया सेक्टर की चिंता

    पत्रकार संगठनों और एडिटर्स गिल्ड ने धारा 7 पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति की जानकारी प्रकाशित करने से पहले सहमति लेना पत्रकारिता की स्वतंत्रता को प्रभावित करेगा।

    • भ्रष्टाचार या घोटालों से जुड़ी रिपोर्टिंग प्रभावित हो सकती है।
    • आशंका है कि डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड पत्रकारों को अपने स्रोत उजागर करने के लिए मजबूर कर सकता है।
    • इससे सूचना का अधिकार (RTI) कमजोर होने और प्रेस स्वतंत्रता पर असर पड़ने की आशंका है।

    भारी जुर्माने का प्रावधान

    कानून का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 50 से 200 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। यही वजह है कि मीडिया संगठनों ने सरकार से नियमों में संशोधन या पत्रकारों के लिए स्पष्ट सुरक्षा प्रावधान की मांग की थी।

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