लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच तेजपुर विश्वविद्यालय को लेकर शिक्षा मंत्रालय (MoE) ने कड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने विश्वविद्यालय के कुलपति शंभू नाथ सिंह को तत्काल प्रभाव से अवकाश पर भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है।
जांच पूरी होने तक जिम्मेदारियों से अलग
मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, कुलपति को जांच पूरी होने तक सभी प्रशासनिक दायित्वों से स्वयं को अलग रखना होगा। समिति को विश्वविद्यालय में मौजूदा हालात, कुलपति पर लगे आरोपों और उनसे जुड़े मामलों की अधिकतम तीन महीने में रिपोर्ट सौंपनी है।
सितंबर से जारी आंदोलन
तेजपुर विश्वविद्यालय में सितंबर 2025 के मध्य से छात्र, शिक्षक और कर्मचारी कुलपति के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं और प्रशासन ने कई मामलों में मनमाना रवैया अपनाया। हाल ही में आंदोलन के 100 दिन पूरे होने पर 24 घंटे की भूख हड़ताल भी की गई।
छात्रों से टकराव के बाद बढ़ा तनाव
22 सितंबर को कुलपति और छात्रों के बीच तीखी बहस के बाद हालात और बिगड़ गए थे। स्थिति तनावपूर्ण होने पर कुलपति को परिसर छोड़ना पड़ा और इसके बाद से वे विश्वविद्यालय नहीं आए। छात्रों का यह भी आरोप है कि एक प्रसिद्ध सांस्कृतिक हस्ती के निधन पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने उचित सम्मान नहीं दिखाया, जिससे असंतोष बढ़ा।
पर्यावरण व प्रशासनिक आरोप
आंदोलन केवल वित्तीय मुद्दों तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय समुदाय का आरोप है कि कुलपति के कार्यकाल में परिसर में वनों की कटाई और पर्यावरणीय नुकसान हुआ, जिस पर भी गंभीर सवाल उठे हैं।
प्रशासनिक संकट और अस्थायी व्यवस्था
प्रदर्शन शुरू होने के बाद से अब तक कम से कम 11 फैकल्टी सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी इस्तीफा दे चुके हैं या विश्वविद्यालय छोड़ चुके हैं। प्रशासनिक कामकाज सुचारु रखने के लिए मंत्रालय ने आईआईटी गुवाहाटी के डिजाइन विभाग के प्रोफेसर अमरेंद्र कुमार दास को तेजपुर विश्वविद्यालय का प्रो-वाइस चांसलर नियुक्त किया है।
शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यह मामला केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक जवाबदेही और छात्र हितों को लेकर एक अहम उदाहरण माना जा रहा है।
