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    December 24, 2025

    चौंकाने वाली रिपोर्ट: AI डेटा सेंटरों ने पूरी दुनिया के बोतलबंद पानी से ज्यादा पानी पी लिया

    अब तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को उसके फायदे और भविष्य की संभावनाओं के लिए सराहा जाता रहा है, लेकिन इससे जुड़ा एक गंभीर पर्यावरणीय पहलू सामने आया है। हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, AI इंडस्ट्री की पानी की खपत अब पूरी दुनिया में इस्तेमाल होने वाले बोतलबंद पानी से भी ज्यादा हो चुकी है।

    डेटा सेंटर गटक रहे भारी मात्रा में पानी

    डच शोधकर्ता एलेक्स डी व्रीज-गाओ के नेतृत्व में की गई इस स्टडी में बताया गया है कि बड़े लैंग्वेज मॉडल और जनरेटिव AI टूल्स को चलाने वाले विशाल डेटा सेंटर सर्वरों को ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, AI सेक्टर हर साल करीब 450 अरब लीटर से ज्यादा पानी की खपत कर रहा है, जो वैश्विक स्तर पर बोतलबंद पानी की कुल खपत से भी अधिक है।

    इसकी मुख्य वजह हाई-परफॉर्मेंस चिप्स हैं, जैसे Nvidia की एडवांस चिप्स, जो AI मॉडल की ट्रेनिंग और इस्तेमाल के दौरान बहुत ज्यादा गर्मी पैदा करती हैं।

    वॉटर कूलिंग सिस्टम से बढ़ रहा दबाव

    चिप्स को अधिक गर्म होने से बचाने के लिए डेटा सेंटरों में वॉटर कूलिंग सिस्टम लगाए जाते हैं। इनमें पानी के वाष्पीकरण के जरिए सर्वरों को ठंडा किया जाता है। कई मामलों में यह पानी स्थानीय सरकारी जल आपूर्ति या पहले से दबाव झेल रहे भूजल स्रोतों से लिया जाता है, जिससे जल संकट और गहराने की आशंका बढ़ रही है।

    हर AI चैट के साथ बढ़ती पानी की खपत

    स्टडी में टेक कंपनियों की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए गए हैं। Microsoft, Google और Meta जैसी कंपनियां भले ही 2030 तक ‘वॉटर पॉजिटिव’ बनने का दावा कर रही हों, लेकिन AI के बढ़ते उपयोग के साथ उनकी वास्तविक पानी की खपत तेजी से बढ़ी है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एक साधारण चैटबॉट से बातचीत करने पर भी डेटा सेंटर करीब 500 मिलीलीटर (आधा लीटर) पानी की खपत कर सकता है। एक अन्य अध्ययन के मुताबिक, सिर्फ अमेरिका में वर्ष 2023 के दौरान AI डेटा सेंटरों ने करीब 66 अरब लीटर पानी का उपयोग किया।

    पर्यावरणीय चुनौती बनता AI

    विशेषज्ञों का कहना है कि अगर AI तकनीक के विस्तार के साथ उसकी पानी और ऊर्जा खपत को लेकर सख्त नीतियां और पारदर्शिता नहीं लाई गई, तो यह भविष्य में एक बड़ी पर्यावरणीय चुनौती बन सकती है। AI के लाभों के साथ-साथ उसके पर्यावरणीय प्रभावों पर भी अब गंभीरता से विचार करना जरूरी हो गया है।

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