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    September 29, 2025

    किशोरों की सुरक्षा को लेकर ओपनएआई का कदम, चैटजीपीटी पर आज से पैरेंटल कंट्रोल लागू

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी ओपनएआई ने अपने चैटजीपीटी प्लेटफॉर्म में बड़े बदलाव किए हैं, खासतौर पर 13 से 18 साल के यूजर्स के लिए। अब माता-पिता अपने बच्चों की चैटिंग पर निगरानी रख सकेंगे और संवेदनशील बातचीत होने पर तुरंत अलर्ट पा सकेंगे।

    संवेदनशील चैट पर मानवीय निगरानी
    अगर कोई किशोर आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुँचाने जैसी बातें लिखता है, तो मानव मॉडरेटर पहले इसे जांचेंगे। स्थिति गंभीर पाए जाने पर माता-पिता को ईमेल, एसएमएस या एप नोटिफिकेशन के जरिए सूचना दी जाएगी।

    कंटेंट फिल्टर और सेफ्टी मोड
    पैरेंट अकाउंट से जुड़े किशोर अकाउंट्स पर ग्राफिक कंटेंट, वायरल चैलेंज, यौन या हिंसक रोलप्ले और चरम सौंदर्य मानकों जैसी सामग्री स्वतः ब्लॉक हो जाएगी।

    पैरेंटल कंट्रोल के नए विकल्प
    माता-पिता अब बच्चों के चैटजीपीटी इस्तेमाल पर और भी नियंत्रण रख पाएंगे:

    • चैटिंग के लिए समय सीमा तय करना (जैसे रात 8 बजे से सुबह 10 बजे तक ब्लॉक)
    • बच्चों का डेटा एआई ट्रेनिंग से बाहर रखना
    • वॉइस मोड और इमेज जेनरेशन बंद करना
    • बॉट की सेव की गई मेमोरी को डिसेबल करना

    गोपनीयता और सुरक्षा का संतुलन
    ओपनएआई का कहना है कि अलर्ट में बच्चों की चैट का पूरा कंटेंट साझा नहीं होगा, सिर्फ यह सूचना दी जाएगी कि बच्चा आत्महत्या या आत्म-नुकसान से जुड़ी बात कर रहा है। माता-पिता को विशेषज्ञों की ओर से सुझाव भी मिलेंगे।

    सामाजिक और कानूनी संदर्भ
    यह बदलाव ऐसे समय में आए हैं जब कुछ माता-पिता ने चैटजीपीटी पर मुकदमा दायर किया था, आरोप था कि चैटबॉट ने उनके किशोर बच्चे को आत्महत्या के लिए प्रेरित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि ओपनएआई की यह पहल अन्य एआई कंपनियों को भी सुरक्षा टूल्स अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।

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