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    December 23, 2025

    ऑनलाइन रिचार्ज, फूड डिलीवरी और कैब में बढ़ता सीमित विकल्पों का दबदबा

    पिछले दिनों IndiGo की हजारों उड़ानें रद्द होने के बाद एविएशन सेक्टर की कई कमजोरियां उजागर हुईं। भले ही इसे नियमों और स्टाफ की कमी से जोड़ा गया, लेकिन इस संकट ने एक बड़ी समस्या की ओर इशारा किया— डुओपॉली। इंडिगो की उड़ानें रद्द होते ही Air India की फ्लाइट्स के दाम अचानक बढ़ गए। मजबूरी में यात्रियों को 50 से 60 हजार रुपये तक के महंगे टिकट खरीदने पड़े। मौजूदा समय में एविएशन सेक्टर में इंडिगो और एयर इंडिया का करीब 65 फीसदी बाजार पर कब्जा है।

    हालांकि यह स्थिति केवल एविएशन सेक्टर तक सीमित नहीं है। देश के कई अहम सेक्टरों में एक या दो कंपनियों का ही दबदबा बन चुका है। जब बाजार में विकल्प सीमित हो जाते हैं, तो उपभोक्ताओं के पास महंगे प्लान या सेवाएं लेने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।

    टेलीकॉम में भी दो कंपनियों का वर्चस्व

    टेलीकॉम सेक्टर में Airtel और Jio मिलकर करीब 75 फीसदी बाजार पर काबिज हैं। बीएसएनएल अब तक 4G नेटवर्क को पूरी तरह मजबूत नहीं कर पाया है, जबकि वोडाफोन-आइडिया के यूजर्स की संख्या लगभग स्थिर है। बीते वर्षों में दोनों बड़ी कंपनियों ने रिचार्ज प्लान के दाम बढ़ाए हैं। सस्ते प्लान या तो बंद हो चुके हैं या फिर काफी महंगे हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित प्रतिस्पर्धा के चलते भविष्य में रिचार्ज और महंगे हो सकते हैं।

    मैसेजिंग ऐप्स में भी सीमित विकल्प

    इंस्टेंट मैसेजिंग के क्षेत्र में भी यही हाल है। WhatsApp देश में सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म है, जिसके करीब 80 करोड़ यूजर्स हैं, जबकि Telegram को लगभग 8.5 करोड़ लोग इस्तेमाल करते हैं। देसी मैसेजिंग ऐप्स को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया, जिससे यह साफ होता है कि इस सेक्टर में भी उपभोक्ता एक-दो विकल्पों तक ही सीमित रह गए हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी सेक्टर में डुओपॉली बनती है, तो इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ता है—कीमतें बढ़ती हैं, विकल्प घटते हैं और सेवा की गुणवत्ता पर दबाव कम हो जाता है।

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