टेक्नोलॉजी की मदद से चीन निवेश की दुनिया में बिल्कुल नया प्रयोग कर रहा है। ब्लॉकचेन तकनीक के जरिए चीन अब पेड़, चाय, शराब और यहां तक कि बांध जैसी वास्तविक संपत्तियों को डिजिटल एसेट में बदल रहा है। इस प्रक्रिया के जरिए कंपनियां निवेश जुटा रही हैं और निवेशकों को नए तरह के अवसर मिल रहे हैं।
चीन के हैनान द्वीप पर पाए जाने वाले दुर्लभ हुआंगहुआली पेड़ों को डिजिटल टोकन में बदला जा रहा है। यह शीशम की बेहद कीमती प्रजाति है, जिसे तैयार होने में कई दशक लग जाते हैं। ऐसे में किसानों और मालिकों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। अब गीली (Geely) टेक्नोलॉजी ग्रुप जैसी कंपनियां इन पेड़ों को रियल वर्ल्ड एसेट (RWA) के रूप में टोकनाइज कर निवेशकों से पैसा जुटा रही हैं। निवेशक पूरे पेड़ की जगह उसके एक हिस्से का डिजिटल शेयर खरीद सकते हैं।
यह तकनीक सिर्फ पेड़ों तक सीमित नहीं है। चीन की मशहूर पु-एर चाय और महंगी बैजू शराब को भी डिजिटल टोकन में बदला जा रहा है। शंघाई की कुछ स्टार्टअप कंपनियां चाय और शराब के पैकेट्स का डिजिटल रिकॉर्ड रख रही हैं, जिनकी कीमत समय के साथ बढ़ती जाती है। ब्लॉकचेन तकनीक से इन उत्पादों की प्रामाणिकता सुनिश्चित होती है और नकली माल पर लगाम लगती है।
इस पूरी प्रक्रिया को टोकनाइजेशन कहा जाता है। इसमें किसी भी वास्तविक संपत्ति—जैसे इमारत, पेड़, रेलवे लाइन या बिजली बनाने वाला बांध—को छोटे-छोटे डिजिटल हिस्सों में बांट दिया जाता है। जैसे-जैसे उस संपत्ति की कीमत बढ़ती है, टोकन धारकों को मुनाफा होता है। चीन के सिचुआन प्रांत में एक बंद पड़े बांध के लिए इसी मॉडल के जरिए करोड़ों रुपये जुटाने की तैयारी चल रही है।
पिछले एक साल में दुनिया भर में डिजिटल एसेट्स का बाजार करीब 115 प्रतिशत बढ़कर 35.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस नई तकनीक का सबसे बड़ा केंद्र हांगकांग बनकर उभर रहा है, जहां नियम मुख्य चीन की तुलना में ज्यादा लचीले हैं।
हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं। बीजिंग सरकार डिजिटल संपत्तियों और क्रिप्टो से जुड़े निवेश को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। नियामक संस्थाओं ने धोखाधड़ी की आशंका को लेकर चेतावनी भी दी है। इसके बावजूद, युवा निवेशक इस मॉडल की ओर आकर्षित हो रहे हैं, क्योंकि ये डिजिटल टोकन किसी काल्पनिक संपत्ति पर नहीं बल्कि वास्तविक और मूल्यवान एसेट्स पर आधारित हैं।
