ग्लोबल इनवेस्टमेंट बैंक Goldman Sachs की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 के लिए केंद्रीय बजट भारत के मध्यम-अवधि के मैक्रोइकॉनॉमिक आउटलुक को मजबूती देता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में निरंतरता बनाए रखते हुए फिस्कल ड्रैग को नरम किया है, जिससे आर्थिक वृद्धि के लिए अनुकूल माहौल तैयार होता है।
गोल्डमैन सैक्स ने इसे अहम संकेत बताया है कि वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने केंद्र सरकार के सार्वजनिक ऋण को जीडीपी के अनुपात में घटाने की प्रतिबद्धता दोहराई है। लक्ष्य है कि FY31 तक ऋण-जीडीपी अनुपात 50% (+/-1%) पर लाया जाए, जो FY27 के 55.6% के स्तर से कम होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, उभरते बाजारों की तुलना में भारत का सार्वजनिक ऋण अभी अपेक्षाकृत ऊंचा है, ऐसे में यह प्रतिबद्धता निवेशकों का भरोसा बढ़ाती है।
राजकोषीय घाटे में कटौती पर फोकस
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने FY27 में राजकोषीय घाटा 10 आधार अंक घटाकर जीडीपी का 4.3% करने का ऐलान किया है। इसके साथ ही, FY27 में फिस्कल ड्रैग का शुद्ध असर FY26 के मुकाबले कम रहने की उम्मीद जताई गई है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश जारी
विकास समर्थन के मोर्चे पर, सार्वजनिक कैपेक्स लक्ष्य जीडीपी के 3.1% पर बरकरार रखा गया है। बजट में रक्षा, रेलवे और सड़कों जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर-लिंक्ड सेक्टरों के लिए मजबूत प्रावधान किए गए हैं। गोल्डमैन सैक्स ने इसे इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को बनाए रखने का रचनात्मक संकेत बताया, हालांकि हाल के वर्षों में निष्पादन बजटीय लक्ष्यों से कुछ कम रहा है।
बैंकिंग सुधारों पर भी नजर
इस बीच, रेटिंग एजेंसी ICRA ने कहा है कि बजट 2026 में घोषित ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्चस्तरीय समिति’ को प्रमोटरों की ओनरशिप स्ट्रक्चर और वोटिंग राइट्स जैसे अहम मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। ICRA के मुताबिक, ये मुद्दे अब भी निजी और विदेशी निवेशकों की भागीदारी को प्रभावित करते हैं।
एजेंसी ने यह भी रेखांकित किया कि 2020 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय के बाद बैंकिंग सेक्टर में समेकन तो हुआ है, लेकिन बैंक निजीकरण में ठोस प्रगति नहीं दिखी है। वित्त मंत्री के अनुसार, यह समिति बैंकिंग सेक्टर की समग्र समीक्षा कर वित्तीय स्थिरता, समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण पर फोकस करेगी।
