बदलती लाइफस्टाइल बच्चों और युवाओं की सेहत के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। जो बीमारियां पहले बढ़ती उम्र में देखने को मिलती थीं, वे अब कम उम्र में ही सामने आ रही हैं। कम उम्र में ब्लड प्रेशर, मोटापा, स्ट्रेस और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याओं के बढ़ते मामलों ने दुनियाभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आज की लाइफस्टाइल तेजी से सेंडेंटरी (बैठे-बैठे बिताने वाली) होती जा रही है। लोग शारीरिक मेहनत कम कर रहे हैं और दिन का बड़ा हिस्सा मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी स्क्रीन के सामने बीत रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बढ़ता स्क्रीन टाइम सेहत के लिए “स्लो-पॉइजन” की तरह काम कर रहा है, खासतौर पर बच्चों के लिए।
बच्चों में ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा स्क्रीन टाइम
अध्ययनों में पाया गया है कि लंबे समय तक स्क्रीन के संपर्क में रहने से बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ता है। अधिक स्क्रीन टाइम से—
- आंखों में जलन, धुंधला दिखना और सिरदर्द जैसी समस्याएं बढ़ती हैं
- नींद प्रभावित होती है, जिससे मोटापा, डायबिटीज और तनाव का खतरा बढ़ता है
- बच्चों में चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी और सामाजिक व्यवहार में बदलाव देखने को मिलता है
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी 5 साल से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य स्क्रीन के ज्यादा संपर्क से बचाने की सलाह देता है।
हालिया अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा
स्क्रीन टाइम को लेकर आई एक ताजा रिपोर्ट ने माता-पिता की चिंता और बढ़ा दी है। अध्ययन में सामने आया है कि घर के छोटे भाई-बहन, बड़े बच्चों की तुलना में मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर पर ज्यादा समय बिताते हैं।
इस रिसर्च के लिए लॉन्गिट्यूडिनल स्टडी ऑफ ऑस्ट्रेलियन चिल्ड्रन के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिसमें 2 से 15 साल के करीब 5,500 बच्चों की दिनचर्या को शामिल किया गया।
- रिपोर्ट के मुताबिक, छोटे बच्चे रोजाना 9–14 मिनट ज्यादा स्क्रीन देखते हैं
- यह बढ़ोतरी कुल स्क्रीन टाइम में 7–10% तक की मानी गई
- हफ्ते में यह अतिरिक्त समय करीब 1 से 1.5 घंटे तक पहुंच जाता है
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अतिरिक्त स्क्रीन टाइम बच्चों की खेल-कूद, सामाजिक गतिविधियों और मानसिक विकास की कीमत पर आता है, जिसका असर आगे चलकर उनकी क्वालिटी ऑफ लाइफ पर पड़ सकता है।
माता-पिता के लिए चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार के बढ़ने के साथ माता-पिता के पास छोटे बच्चों पर ध्यान देने का समय कम हो जाता है, जिससे वे ज्यादा समय स्क्रीन के सहारे बिताने लगते हैं। एक्सपर्ट्स ने माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नजर रखने, आउटडोर एक्टिविटी बढ़ाने और संतुलित लाइफस्टाइल अपनाने की सलाह दी है, ताकि कम उम्र में होने वाली गंभीर बीमारियों से बच्चों को बचाया जा सके।
