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    June 02, 2026

    नाली निर्माण पर उठे सवाल: रोड़ी-सरिए की जगह ईंट लगाने का आरोप

    अलवर में 95 लाख की नाली पहली बारिश में ढही, निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप

    अलवर नगर निगम की ओर से कराए जा रहे निर्माण कार्य में बड़ी लापरवाही सामने आई है। निगम ने विभिन्न विकास कार्यों के लिए करीब 2 करोड़ रुपए का ठेका दिया था। इनमें तिजारा फाटक के पास शिव कॉलोनी में लगभग 95 लाख रुपए की लागत से नाली निर्माण का कार्य भी शामिल है। हाल ही में हुई हल्की बारिश में तैयार नाली का बड़ा हिस्सा ढह गया, जिसके बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया।

    स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि नाली निर्माण में निर्धारित रोड़ी और सरिए की जगह ईंटों का उपयोग किया गया। साथ ही, बेहद कम मात्रा में सीमेंट और मसाले का इस्तेमाल कर निर्माण कार्य किया गया। लोगों का कहना है कि निर्माण की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि नाली पहली ही बारिश नहीं झेल सकी।

    शिव कॉलोनी निवासी विनोद कुमार ग्रोवर ने कहा कि निर्माण में सीमेंट का नामोनिशान नहीं है और मसाला भी बेहद कम लगाया गया है। हुकम चंद ने बताया कि मामले की शिकायत जेईएन और सरकार के 181 हेल्पलाइन नंबर पर भी की गई है।

    स्थानीय महिला सरोज ने कहा कि चार महीने तक खुदाई कर क्षेत्र को छोड़ दिया गया, जिससे लोगों को परेशानी हुई और बच्चे तक गड्ढों में गिर गए। वहीं विजय लक्ष्मी ने आरोप लगाया कि लंबे समय तक खुदाई और जलभराव के कारण उनके घर की दीवारों में दरारें आ गई हैं। बुजुर्ग अमर सिंह ने भी निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि नाली की नींव और दीवारें मानकों के अनुरूप नहीं बनाई गईं।

    पूर्व पार्षद सोनू चौधरी ने आरोप लगाया कि ठेकेदार, निगम कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया निर्माण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह कार्य तीन महीने में पूरा होना था, लेकिन आठ महीने बाद भी अधूरा है। उनके अनुसार, करीब ढाई किलोमीटर लंबी नाली के निर्माण पर 95 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक 10 प्रतिशत काम भी पूरा नहीं हुआ है।

    स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि नाली का बड़े नाले से सही तरीके से मिलान (अलाइनमेंट) नहीं किया गया है। ऐसे में निर्माण पूरा होने के बाद भी पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है।

    पूर्व पार्षद ने दावा किया कि ठेकेदार ने यह टेंडर अनुमानित लागत से 49 प्रतिशत कम दर पर लिया है। उनका कहना है कि इतनी कम दर पर गुणवत्तापूर्ण निर्माण संभव नहीं है। उन्होंने अधिकारियों पर भी मिलीभगत का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि निर्माण कार्य के कारण जिन मकानों में दरारें आई हैं, उनके नुकसान की भरपाई कौन करेगा। साथ ही उन्होंने नगर निगम अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करने और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है।

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