हाल के वर्षों में कई प्रकार की घातक बीमारियों का खतरा बच्चों में तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि मेडिकल विज्ञान की प्रगति के चलते बाल मृत्यु दर में कमी आई है, लेकिन निमोनिया जैसी बीमारियां अब भी बच्चों की जान के लिए गंभीर चिंता का कारण हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, हर साल पांच वर्ष से कम उम्र के 7 लाख से अधिक बच्चे सिर्फ निमोनिया के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। यह बच्चों की मृत्यु का प्रमुख कारण बना हुआ है, खासकर उन बच्चों में जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं हुई होती।
डॉक्टरों का कहना है कि निमोनिया फेफड़ों का गंभीर संक्रमण है, जो वायरस, बैक्टीरिया या फंगस के कारण हो सकता है। इसके प्रमुख लक्षण हैं:
- तेज बुखार और बलगम के साथ खांसी
- सांस लेने में कठिनाई, घरघराहट
- सीने में दर्द, खासकर खांसने या सांस लेने पर
- थकान और भूख कम लगना
- मतली या उल्टी
छोटे बच्चे, कुपोषित या जिनकी इम्युनिटी कमजोर है, उनमें यह खतरा और बढ़ जाता है। ठंड के मौसम में इसके मामले अधिक देखने को मिलते हैं।
बचाव और इलाज के उपाय:
- बच्चों को टीकाकरण कराना आवश्यक है।
- साफ-सुथरा और प्रदूषण से मुक्त वातावरण में रखें।
- स्तनपान कराते रहें ताकि बच्चे को पर्याप्त पोषण मिले।
- संक्रमण के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें; बैक्टीरियल संक्रमण में एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- घरेलू उपाय जैसे गुनगुना पानी और गरारे लक्षण कम करने में मदद कर सकते हैं।
इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बचाव के उपायों को साझा करने के लिए हर साल 12 नवंबर को वर्ल्ड निमोनिया डे मनाया जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर इलाज और सही जीवनशैली अपनाने से बच्चों को इस जानलेवा बीमारी से बचाया जा सकता है।
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