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    December 05, 2025

    धार्मिक प्रथाओं पर हाईकोर्ट के आदेश से असहमति, राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत का दरवाज़ा खटखटाया

    सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की सहमति दे दी है, जिसमें मदुरै की थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित ‘दीपाथून’ में दीया प्रज्वलित करने की मद्रास हाईकोर्ट की अनुमति को चुनौती दी गई है।
    मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राज्य सरकार के पक्ष में पेश वकील की दलीलें सुनते हुए कहा कि याचिका को उपयुक्त पीठ के सामने सूचीबद्ध करने पर विचार किया जाएगा।

    हाईकोर्ट ने दी थी दीप प्रज्वलन की अनुमति

    मद्रास हाईकोर्ट ने अरुलमिघु सुब्रमण्य स्वामी मंदिर के श्रद्धालुओं को पारंपरिक कार्तिगई दीपम प्रज्वलित करने की मंजूरी दी थी। जिस पत्थर के दीए ‘दीपाथून’ को जलाया जाना है, वह एक दरगाह के पास स्थित है—इसी वजह से विवाद खड़ा हुआ।
    मदुरै जिलाधिकारी और शहर के पुलिस कमिश्नर की इंट्रा-कोर्ट अपील को भी हाईकोर्ट ने गुरुवार को खारिज कर दिया था।

    मामला कैसे बढ़ा?

    1 दिसंबर को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कहा था कि दीपाथून पर दीप प्रज्वलन का दायित्व मंदिर का है और यह दरगाह या मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता।
    इसके बावजूद दीया नहीं जलाया गया, जिसके बाद 3 दिसंबर को अदालत ने श्रद्धालुओं को दीप प्रज्वलित करने का निर्देश दिया और CISF को सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी।
    एकल पीठ के आदेश के खिलाफ तमिलनाडु प्रशासन ने अपील दायर की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया—और अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है।

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