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    May 22, 2026

    थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूले पर कानूनी लड़ाई, पेरेंट्स ने SC में दाखिल की याचिका

    CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। शुक्रवार को 19 लोगों के एक समूह ने इस नीति के खिलाफ याचिका दाखिल की। याचिकाकर्ताओं में छात्र, अभिभावक और शिक्षक शामिल हैं। यह याचिका कक्षा 9वीं में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू किए जाने के विरोध में दायर की गई है। मामले पर सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई करेगा।

    CBSE ने 15 मई को जारी सर्कुलर में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9वीं और 10वीं में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने का फैसला किया था। बोर्ड के अनुसार यह नोटिफिकेशन 1 जुलाई से लागू होगा और छात्रों को 31 मई तक तीसरी भाषा चुनने का समय दिया गया है।

    मामले की सुनवाई जस्टिस जॉयमाल्या और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच करेगी। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा।

    याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CBSE अपने पुराने फैसले से पलट गया है। उन्होंने बताया कि 9 अप्रैल को जारी सर्कुलर में बोर्ड ने कहा था कि तीसरी भाषा का नियम 2029-30 तक 9वीं कक्षा पर लागू नहीं होगा। इसके बावजूद अब अचानक इसे लागू किया जा रहा है।

    याचिका में CBSE और NCERT पर मनमाना फैसला लेने का आरोप लगाया गया है। अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि बोर्ड पहले ही मान चुका है कि कई स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक और जरूरी किताबों की कमी है, फिर भी इस नीति को लागू करने का दबाव बनाया जा रहा है।

    याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी छात्र या राज्य पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी। ऐसे में यह फैसला NEP की भावना के खिलाफ है।

    CBSE के नए नियम के तहत 9वीं और 10वीं के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। हालांकि बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इस साल 10वीं बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा का पेपर नहीं लिया जाएगा, लेकिन उसकी पढ़ाई जरूरी होगी।

    CBSE और NCERT तीसरी भाषा के लिए 19 भारतीय भाषाओं में किताबें तैयार कर रहे हैं। इनमें असमिया, बंगाली, गुजराती, मराठी, तमिल और तेलुगु जैसी भाषाएं शामिल हैं। बोर्ड ने स्कूलों को 30 जून तक अपनी चुनी गई तीसरी भाषा की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।

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